पंजाबी रॉकस्टार और अभिनेता दिलजीत दोसांझ की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर इस समय पूरे देश के सिनेमा और राजनीतिक गलियारों में भारी घमासान मचा हुआ है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के महज दो दिन बाद ही इस फिल्म को अचानक भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म जी५ (Zee5) से पूरी तरह हटा दिया गया है। फिल्म पर अचानक लगे इस प्रतिबंध और बैन से उनके प्रशंसक बेहद हैरान और निराश हैं।
इस पूरे विवाद और फिल्म के अचानक गायब होने पर खुद अभिनेता दिलजीत दोसांझ का बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने दुख जताने के साथ-साथ एक बेहद बेबाक बात भी कही है। चलिए इस पूरी घटना और फिल्म पर मचे बवाल को विस्तार से समझते हैं।
Diljit Dosanjh: ‘फिल्म घर-घर पहुंच चुकी है, यही मकसद था’, ‘सतलुज’ पर बैन लगने पर बोले दिलजीत दोसांझ
शूटिंग के वक्त हुई तकलीफ और राजनीतिज्ञों पर बोला हमला
फिल्म पर प्रतिबंध लगने के बाद दिलजीत दोसांझ ने अपने आधिकारिक बयान में गहरी निराशा और दुख व्यक्त किया है। उन्होंने फिल्म के निर्माण के दिनों को याद करते हुए बताया कि इस संवेदनशील विषय पर शूटिंग करने के दौरान पूरी टीम को मानसिक और शारीरिक रूप से कितनी तकलीफों का सामना करना पड़ा था। दिलजीत ने सीधे तौर पर राजनीतिज्ञों और व्यवस्था पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कुछ लोगों के अंदर अब इंसानियत नाम की चीज नहीं बची है, जो इतिहास के सच को दबाना चाहते हैं।
‘फिल्म घर-घर पहुंच चुकी है, यही मकसद था’
भले ही फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया हो, लेकिन दिलजीत दोसांझ ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। उन्होंने बेहद मजबूती से कहा:
“भले ही उन्होंने फिल्म को आज प्लेटफॉर्म से हटा दिया है, लेकिन शुरुआती दो दिनों में ही यह फिल्म देश के कोने-कोने और घर-घर तक पहुंच चुकी है। हमारा मकसद इस सच्चाई को जनता के सामने लाना था, और हमारा वह मकसद पूरी तरह से कामयाब रहा है।”
‘सतलुज’ भारत में ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म से हटाई गई, दिलजीत दोसांझ ने ये कहा
फ़िल्म की रिलीज़ क्यों टलती रही?
‘सतलुज’ कोई सामान्य फिल्म नहीं है, बल्कि यह पंजाब के इतिहास के एक बेहद संवेदनशील दौर पर आधारित है। यही कारण है कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सेंसर बोर्ड) और कानूनी अड़चनों की वजह से इस फिल्म की रिलीज पिछले कई महीनों से लगातार टलती आ रही थी। काफी कशमकश और कांट-छांट के बाद इसे आखिरकार डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की मंजूरी मिली थी, लेकिन रिलीज के महज ४८ घंटों के भीतर ही इसे दोबारा देश में प्रतिबंधित कर दिया गया।
क्या है फिल्म की कहानी और कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा?
इस फिल्म की पूरी कहानी पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा (Jaswant Singh Khalra) के वास्तविक जीवन और उनके संघर्षों पर आधारित है। ९० के दशक के दौरान पंजाब में उग्रवाद के काले दौर में जसवंत सिंह खालड़ा ने हजारों लावारिस शवों और कथित रूप से गायब किए गए युवाओं के सच को दुनिया के सामने उजागर किया था। बाद में रहस्यमयी परिस्थितियों में उनका भी अपहरण कर लिया गया और उनकी जान चली गई। फिल्म इसी दर्दनाक और ऐतिहासिक सच को दिखाती है, जिस पर अब दोबारा सेंसरशिप का हथौड़ा चला है।
रिलीज के 2 दिन बाद जी5 से गायब हुई ‘सतलुज’, सुखबीर बादल ने जताई नाराजगी
२ दिन में ओटीटी से गायब हुई ‘सतलुज’ और राजनीतिक विरोध
जी५ से फिल्म के अचानक गायब होने के बाद पंजाब की राजनीति में भी उबाल आ गया है। शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सुखबीर सिंह बादल ने इस प्रतिबंध पर कड़ी नाराजगी और विरोध जताया है। उन्होंने कहा कि सिखों और पंजाब के इतिहास से जुड़े सच को इस तरह दबाना पूरी तरह से गलत और अलोकतांत्रिक है। अभिव्यक्ति की आजादी पर इस तरह का प्रहार पंजाब के लोगों की भावनाओं को आहत करने वाला है।
🎬 'सतलुज' फिल्म विवाद का मुख्य विवरण:
+------------------------+------------------------------------------+
| मुख्य बिंदु | विवरण |
+------------------------+------------------------------------------+
| मुख्य अभिनेता | दिलजीत दोसांझ |
| किस पर आधारित है | मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा |
| डिजिटल प्लेटफॉर्म | जी५ (Zee5) - अब भारत में प्रतिबंधित |
| हटाने की समयावधि | रिलीज के ठीक २ दिन बाद |
| मुख्य राजनीतिक विरोध | सुखबीर सिंह बादल द्वारा |
+------------------------+------------------------------------------+
यह भी पढ़े
- ‘तारक मेहता’ ने बनाया स्टार, जब 16 साल बाद ‘गोली’ ने छोड़ा शो, बोले- बहुत रोया
- महादेव सा पति चाहती हैं कोरियोग्राफर, नहीं रचाई शादी, बोलीं- जब लोग ताने मारते हैं तो बुरा लगता है
- दिलजीत दोसांझ की ‘पंजाब 95’ ‘सतलुज’ नाम से रिलीज़, फ़िल्म के किरदार जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
फिल्म ‘सतलुज’ को भारत में क्यों बंद किया गया है?
इस पूरे विवाद का मुख्य फोकस कीवर्ड भारत में बंद हुई दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ है। फिल्म को पंजाब के ९० के दशक के बेहद संवेदनशील और राजनीतिक रूप से विवादित मानवाधिकार मुद्दों को दिखाने के कारण अचानक भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे, जिन पर यह फिल्म बनी है?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के एक महान मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने ९० के दशक में पंजाब पुलिस द्वारा कथित तौर पर गायब किए गए और लावारिस जलाए गए हजारों युवाओं की सूची और सच को पूरी दुनिया के सामने लाकर रख दिया था।
फिल्म के बैन होने पर दिलजीत दोसांझ की क्या प्रतिक्रिया रही?
दिलजीत दोसांझ ने कहा कि भले ही फिल्म को अब हटा दिया गया है, लेकिन शुरुआती दो दिनों में ही यह फिल्म घर-घर तक पहुंच चुकी है और सच को जनता तक पहुंचाने का उनका मुख्य मकसद पूरी तरह सफल रहा है।
निष्कर्ष
दिलजीत दोसांझ की ‘सतलुज’ पर लगा यह प्रतिबंध एक बार फिर सिनेमा की आजादी और ऐतिहासिक सच को दिखाने के अधिकारों पर बड़े सवाल खड़े करता है। जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन को पर्दे पर उतारना हमेशा से एक बड़ी चुनौती थी, जिसे दिलजीत ने पूरी शिद्दत से निभाया। हालांकि फिल्म को ओटीटी प्लेटफॉर्म जी५ से हटा दिया गया है, लेकिन सोशल मीडिया पर और राजनीतिक मंचों पर इस फिल्म को लेकर शुरू हुई बहस यह साफ बताती है कि इस आवाज को दबाना अब आसान नहीं होगा।
Discover more from वैंटेज पोस्ट IN
Subscribe to get the latest posts sent to your email.