प्रशांत किशोर लड़ेंगे उपचुनाव, बीजेपी अध्यक्ष की छोड़ी गई सीट से होंगे जन सुराज के उम्मीदवार

बिहार की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा भूचाल आ गया है। चुनावी रणनीतिकार से राजनेता बने जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर अब खुद चुनावी मैदान में उतरने जा रहे हैं। जन सुराज की कोर कमेटी की बैठक के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया है कि प्रशांत किशोर लड़ेंगे उपचुनाव। वह पटना की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट से अपनी किस्मत आजमाएंगे।

यह सीट भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी। अब प्रशांत किशोर इस खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव में जन सुराज के आधिकारिक उम्मीदवार होंगे। इस हाई-प्रोफाइल सीट पर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है और सभी की नजरें इस मुकाबले पर टिक गई हैं।


प्रशांत किशोर बांकीपुर सीट से लड़ेंगे उपचुनाव, जनसुराज ने किया ऐलान

जन सुराज पार्टी का बड़ा फैसला, ३० जुलाई को होगा मतदान

जन सुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने रविवार ५ जुलाई को एक मुख्य प्रेस वार्ता में प्रशांत किशोर के नाम की घोषणा की। इस घोषणा के बाद से ही पटना का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। निर्वाचन आयोग के तय कार्यक्रम के अनुसार इस सीट पर ३० जुलाई को मतदान कराया जाएगा, जबकि मतों की गिनती ३ अगस्त को होगी। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख १३ जुलाई तय की गई है।

अपनी उम्मीदवारी पर क्या बोले प्रशांत किशोर

चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा के बाद प्रशांत किशोर ने अपने कार्यकर्ताओं और साथियों का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बांकीपुर से चुनाव लड़ना बिहार में एक नए प्रकार की राजनीति की शुरुआत है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:

“बांकीपुर की जनता बिहार में सबसे अधिक शिक्षित और समृद्ध है। अगर वे मुझे अपनी सेवा का मौका देते हैं और मुझ पर भरोसा जताते हैं, तो विधानसभा में हमारा एक अकेला विधायक ही बाकी २४२ विधायकों पर भारी पड़ेगा।”


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खुद को पार्टी के फैसलों के आगे रखकर उतरे मैदान में

प्रशांत किशोर ने पहले खुद चुनाव लड़ने से हमेशा दूरी बनाई थी, लेकिन पार्टी की कोर कमेटी की बैठक में जब उनके नाम का प्रस्ताव आया तो उन्होंने इसे सहर्ष स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों से जन सुराज ही उनका जीवन है और अगले दस वर्षों तक बिहार के बदलाव के अलावा उनका कोई दूसरा उद्देश्य नहीं है।

भाजपा के मजबूत गढ़ में प्रशांत किशोर की सीधी चुनौती

बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले कई दशकों से भारतीय जनता पार्टी का सबसे मजबूत शहरी गढ़ रही है। यहाँ का व्यापारी वर्ग और प्रभावशाली मतदाता समूह हमेशा से भाजपा का मुख्य आधार रहा है। नितिन नवीन यहाँ से लगातार चुनाव जीतते आ रहे थे। प्रशांत किशोर ने इस उपचुनाव को मौजूदा सरकार के कामकाज पर एक जनमत संग्रह करार दिया है। उनका मानना है कि यदि वे यह उपचुनाव जीतते हैं, तो उनका व्यवस्था परिवर्तन का आंदोलन और मजबूत होगा।


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कांग्रेस नेता ऋषि मिश्रा की विपक्षी दलों को सलाह

प्रशांत किशोर के मैदान में आने के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ऋषि मिश्रा का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने सुझाव दिया है कि भाजपा को उसके इस मजबूत गढ़ में पटखनी देने के लिए पूरे विपक्ष को मिलकर काम करना चाहिए। ऋषि मिश्रा ने प्रशांत किशोर को सलाह दी है कि उन्हें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख नेताओं से बातचीत करनी चाहिए, ताकि बांकीपुर में भाजपा के खिलाफ एक ही मजबूत उम्मीदवार उतारा जा सके।

राजद और जन सुराज का अपना-अपना रुख

कांग्रेस जहाँ समर्थन देने के संकेत दे रही है, वहीं राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अंतिम फैसले का अभी इंतजार है। राजद भी इस शहरी क्षेत्र में वोटों के बिखराव का फायदा उठाने की कोशिश में जुटी है। दूसरी तरफ, प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि जन सुराज यह चुनाव किसी गठबंधन के तहत नहीं, बल्कि अपने दम पर अकेले लड़ रहा है। हालांकि, उन्होंने कहा कि जो भी लोग बिहार में नई राजनीति की शुरुआत में मदद करना चाहते हैं, वे उनके समर्थन का स्वागत करते हैं।

📋 बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव २०२६ का मुख्य विवरण:
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| मुख्य बिंदु             | विवरण और तारीख                           |
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| जन सुराज उम्मीदवार      | प्रशांत किशोर                             |
| खाली करने वाले नेता     | नितिन नवीन (भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष)     |
| नामांकन की अंतिम तिथि  | १३ जुलाई २०२६                            |
| मतदान की तारीख         | ३० जुलाई २०२६                            |
| नतीजों की घोषणा        | ३ अगस्त २०२६                             |
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प्रशांत किशोर किस विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ रहे हैं?

इस पूरे घटनाक्रम और लेख का मुख्य फोकस कीवर्ड प्रशांत किशोर लड़ेंगे उपचुनाव है, जिसके तहत वे पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से अपना पहला चुनाव लड़ने जा रहे हैं।

बांकीपुर विधानसभा सीट क्यों खाली हुई थी?

यह सीट भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बिहार से राज्यसभा सदस्य चुने जाने के बाद खाली हुई थी, जिसके कारण यहाँ उपचुनाव कराया जा रहा है।

बांकीपुर में मतदान और मतगणना कब होगी?

भारतीय निर्वाचन आयोग के अनुसार बांकीपुर सीट पर ३० जुलाई को सुबह से मतदान होगा और ३ अगस्त को वोटों की गिनती के बाद परिणाम घोषित किए जाएंगे।


निष्कर्ष

प्रशांत किशोर का बांकीपुर के चुनावी रण में उतरना बिहार की राजनीति के लिए एक बहुत बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है। पिछले विधानसभा चुनाव में खाता न खोल पाने के बाद जन सुराज के लिए यह अपनी ताकत दिखाने का सबसे बड़ा अवसर है। भाजपा के इस सुरक्षित किले में प्रशांत किशोर की एंट्री ने मुकाबले को बेहद त्रिकोणीय और दिलचस्प बना दिया है। अब देखना यह होगा कि ३० जुलाई को बांकीपुर की प्रबुद्ध जनता विकास के दावों पर मुहर लगाती है या प्रशांत किशोर की नई राजनीति को चुनती है。

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