भारतीय सिनेमा जगत और ओटीटी प्लेटफॉर्म से इस समय एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। मशहूर अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की एक ऐसी फिल्म, जो पिछले 4 साल से सेंसर बोर्ड के चक्करों और विवादों में फंसी हुई थी, वह अचानक रिलीज कर दी गई है। दिलजीत दोसांझ की ‘पंजाब 95’ अब ‘सतलुज’ नाम से ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (Zee5) पर रिलीज हो गई है।
इस फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच भारी उत्सुकता है क्योंकि इसकी कहानी एक ऐसे इंसान पर आधारित है जिसने पंजाब के इतिहास में मानवाधिकारों के लिए अपनी जान दांव पर लगा दी थी। आखिर कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा, जिनकी कहानी पर यह फिल्म बनी है? इस फिल्म के रिलीज होने में क्या-क्या दिक्कतें आईं और अब इसका नाम ‘सतलुज’ क्यों रखा गया? चलिए इस पूरी कहानी को बहुत ही आसान और सीधे शब्दों में समझते हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित दिलजीत दोसांझ की फ़िल्म अब ‘सतलुज’ नाम से ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म ज़ी5 पर रिलीज़ हो गई है
दिलजीत दोसांझ हमेशा से ही अपनी संजीदा और दमदार अदाकारी के लिए जाने जाते हैं। ‘अमर सिंह चमकीला’ और ‘जोगी’ जैसी फिल्मों के बाद अब वे एक और बेहद कड़े और संवेदनशील किरदार में नजर आ रहे हैं। यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्षों को दिखाती है। फिल्म का इंतजार दर्शक पिछले चार सालों से कर रहे थे, और अब बिना किसी बड़े शोर-शराबे या विज्ञापन के इसे अचानक ज़ी5 पर दर्शकों के लिए उपलब्ध करा दिया गया है।
फिल्म रिलीज़ होने पर दिलजीत ने क्या कहा?
इस फिल्म की रिलीज दिलजीत दोसांझ के लिए बेहद भावुक क्षण है। फिल्म के अचानक दर्शकों के सामने आने पर दिलजीत ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं है, बल्कि एक ऐसे इंसान की सच्चाई है जिसे दुनिया के सामने आना ही चाहिए था। दिलजीत ने बताया कि इस किरदार को जीना उनके जीवन के सबसे मुश्किल और जिम्मेदारी भरे कामों में से एक था। उन्होंने दर्शकों से अपील की है कि वे इस कहानी को एक इंसान के नजरिए से देखें और इसके दर्द को महसूस करें।
‘धुरंधर’ के बाद एक और धांसू किरदार में लौटे मेजर इकबाल, मानव अधिकार कार्यकर्ता की कहानी देख पसीज जाएगा दिल
फिल्म में सिर्फ दिलजीत दोसांझ ही नहीं, बल्कि कई अन्य कलाकारों ने भी अपनी अदाकारी से जान फूंक दी है। फिल्म ‘धुरंधर’ में अपनी बेहतरीन एक्टिंग का लोहा मनवाने वाले अभिनेता मानव विज इस फिल्म में एक बार फिर ‘मेजर इकबाल’ के एक बेहद धांसू और कड़क किरदार में लौटे हैं। जसवंत सिंह खालड़ा के संघर्ष और पंजाब के उस दौर के काले सच को जिस तरह पर्दे पर उतारा गया है, उसे देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का दिल पसीज जाएगा। यह फिल्म मनोरंजन से कहीं आगे बढ़कर न्याय और हक की लड़ाई को दिखाती है।
क्या है ‘सतलुज’ की कहानी?
‘सतलुज’ फिल्म की कहानी पंजाब के 90 के दशक के उस दौर पर आधारित है, जब वहां उथल-पुथल मची हुई थी। फिल्म मुख्य रूप से जसवंत सिंह खालड़ा के उस खोजी अभियान को दिखाती है, जिसमें उन्होंने पंजाब पुलिस द्वारा लावारिस बताकर जलाए गए हजारों अज्ञात शवों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी थी। उन्होंने सरकारी आंकड़ों और श्मशान घाटों के रिकॉर्ड खंगालकर यह साबित किया था कि कैसे हजारों बेकसूर युवाओं को गायब कर दिया गया। यह कहानी एक आम बैंक कर्मचारी के मानवाधिकार कार्यकर्ता बनने और फिर इसी हक की लड़ाई में खुद गायब हो जाने के दर्दनाक सफर को बयां करती है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के एक बेहद सम्मानित मानवाधिकार कार्यकर्ता थे। पेशे से वे एक बैंक में डायरेक्टर के पद पर काम करते थे, लेकिन पंजाब के अशांत दौर में जब उन्होंने अपने आसपास के परिवारों के बच्चों को अचानक गायब होते देखा, तो उनका दिल दहल गया। उन्होंने अमृतसर और आसपास के जिलों के श्मशान घाटों से गुप्त रूप से डेटा इकट्ठा किया और देश-दुनिया को बताया कि लगभग 25,000 युवाओं को अवैध रूप से उठाकर लावारिस लाशों के रूप में जला दिया गया था।
वे इस सच्चाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कनाडा और ब्रिटेन भी गए। लेकिन सितंबर 1995 में, जब वे अपने घर के बाहर कार धो रहे थे, तब कुछ अज्ञात लोगों ने उन्हें अगवा कर लिया। इसके बाद वे कभी वापस नहीं लौटे। साल 2005 में कोर्ट ने इस मामले में कई पुलिस अधिकारियों को दोषी पाया और उन्हें सजा सुनाई। जसवंत सिंह खालड़ा को आज भी पंजाब में सच्चाई और हक की आवाज बुलंद करने वाले नायक के रूप में याद किया जाता है।
दिलजीत दोसांझ की 4 साल से फंसी फिल्म ‘पंजाब 95’, ‘सतलुज’ नाम से अचानक रिलीज, विवाद की वजह थी ये कहानी
यह फिल्म साल 2022-23 से ही बनकर तैयार थी और इसे ‘पंजाब 95’ के नाम से रिलीज किया जाना था। लेकिन जैसे ही यह फिल्म सेंसर बोर्ड के पास पहुंची, इस पर विवाद शुरू हो गया। फिल्म की कहानी में पंजाब पुलिस और व्यवस्था के उस काले पक्ष को दिखाया गया था, जिसे लेकर सेंसर बोर्ड ने कड़ी आपत्ति जताई। बोर्ड का मानना था कि इस कहानी से कानून-व्यवस्था और देश की संप्रभुता पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कहानी के चलते फिल्म पिछले चार साल से ठंडे बस्ते में पड़ी हुई थी।
सेंसर बोर्ड ने सुझाए थे 100 से ज्यादा कट
विवाद इस कदर बढ़ गया था कि केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) ने फिल्म को पास करने के लिए इसमें 100 से भी ज्यादा कट लगाने का सुझाव दिया था। बोर्ड चाहता था कि फिल्म से कई संवेदनशील संवाद, पुलिसिया कार्रवाई के दृश्य और पंजाब के कुछ खास राजनीतिक संदर्भों को पूरी तरह से हटा दिया जाए। मेकर्स इस बात के लिए तैयार नहीं थे क्योंकि इससे फिल्म की मूल आत्मा मर जाती। काफी कानूनी लड़ाइयों और बदलावों के बाद आखिरकार फिल्म को रिलीज का रास्ता मिला।
फ़िल्म के नाम के बारे में डायरेक्टर ने क्या कहा?
फिल्म के निर्देशक हनी त्रेहान ने फिल्म का नाम ‘पंजाब 95’ से बदलकर ‘सतलुज’ रखने पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड की आपत्तियों और फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने की मजबूरी के कारण उन्हें यह समझौता करना पड़ा। ‘सतलुज’ पंजाब की सबसे बड़ी और पवित्र नदियों में से एक है, जो पंजाब के सुख-दुख की गवाह रही है। डायरेक्टर के मुताबिक, यह नाम पंजाब के लोगों के सब्र, उनकी आत्मा और उनके बहते आंसुओं को दर्शाता है, इसलिए यह नाम इस कहानी के लिए बिल्कुल सटीक है।
फ़िल्म की रिलीज़ में आई दिक्कतों के बारे में डायरेक्टर ने क्या कहा?
निर्देशक हनी त्रेहान ने बताया कि इस फिल्म को रिलीज कराना उनके जीवन की सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा थी। उन्होंने कहा, “एक सच्ची कहानी को पर्दे पर लाना भारत में आसान नहीं है। हमें हर मोड़ पर दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कभी कोर्ट के चक्कर काटने पड़े तो कभी सेंसर बोर्ड के सामने अपनी बात रखनी पड़ी। कई बार ऐसा लगा कि यह फिल्म कभी दुनिया के सामने आ ही नहीं पाएगी। लेकिन हमें खुशी है कि तमाम कट्स और नाम बदलने के बाद भी हम जसवंत सिंह खालड़ा की इस जरूरी कहानी को लोगों तक पहुंचाने में कामयाब रहे।”
कौन-कौन से कलाकार आए नजर?
फिल्म में अभिनय के मामले में कोई कसर नहीं छोड़ी गई है। मुख्य भूमिकाओं में ये कलाकार नजर आए हैं:
- दिलजीत दोसांझ: जिन्होंने जसवंत सिंह खालड़ा के शांत, गंभीर और दृढ़ संकल्पी किरदार को बेहद सादगी और गहराई के साथ निभाया है।
- अर्जुन रामपाल: फिल्म में एक बेहद महत्वपूर्ण और कड़े पुलिस अधिकारी की भूमिका में नजर आए हैं, उनका लुक और एक्टिंग काफी दमदार है।
- मानव विज: मेजर इकबाल के किरदार में उन्होंने एक बार फिर अपनी बेहतरीन अदाकारी का जलवा बिखेरा है।
- गीतिका विद्या ओस्यान: जिन्होंने जसवंत सिंह खालड़ा की पत्नी परमजीत कौर का किरदार निभाया है, जो अपने पति के गायब होने के बाद आज भी इंसाफ की लड़ाई लड़ रही हैं।
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‘सतलुज’ फिल्म किस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई है?
दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ को ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 (Zee5) पर रिलीज किया गया है।
फिल्म ‘सतलुज’ का पुराना नाम क्या था और यह क्यों बदला गया?
इस फिल्म का पुराना नाम ‘पंजाब 95’ था। सेंसर बोर्ड की कड़ी आपत्तियों और विवादों के कारण फिल्म का नाम बदलकर ‘सतलुज’ रखा गया है।
जसवंत सिंह खालड़ा कौन थे और उनके साथ क्या हुआ था?
जसवंत सिंह खालड़ा पंजाब के एक मानवाधिकार कार्यकर्ता थे, जिन्होंने 90 के दशक में लावारिस बताकर जलाए गए हजारों अज्ञात शवों की सच्चाई दुनिया के सामने रखी थी। सितंबर 1995 में उन्हें अगवा कर लिया गया था, जिसके बाद वे कभी नहीं मिले।
निष्कर्ष
‘सतलुज’ सिर्फ एक कमर्शियल फिल्म नहीं है, बल्कि यह सिनेमा के जरिए इतिहास के एक बेहद दर्दनाक और जरूरी पन्ने को पलटने की कोशिश है। दिलजीत दोसांझ और अर्जुन रामपाल जैसे कलाकारों ने इस संवेदनशील विषय को जिस मैच्योरिटी के साथ पर्दे पर उतारा है, उसकी तारीफ होनी चाहिए। भले ही सेंसर बोर्ड के कट्स की वजह से फिल्म में कुछ बदलाव देखने को मिलें, लेकिन एक इंसान के हक और इंसाफ की यह कहानी हर देखने वाले के दिल को झकझोर कर रख देगी। अगर आप सच्ची घटनाओं पर आधारित सिनेमा पसंद करते हैं, तो ज़ी5 पर इस फिल्म को एक बार जरूर देखा जाना चाहिए।
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