राजनीति डेस्क, नई दिल्ली:
देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले इक्कीस दिनों से चल रहा सोनम वांगचुक का अनशन अब एक बड़े सियासी और प्रशासनिक विवाद में तब्दील हो गया है। शिक्षा व्यवस्था में सुधार, नीट परीक्षा पेपर लीक मामले की जांच और जवाबदेही की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे वांगचुक को पुलिस द्वारा जबरन हटाए जाने के बाद से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सफदरजंग अस्पताल में भर्ती वांगचुक और उनके परिवार ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, वहीं इस आंदोलन की गूंज अब अमेरिका तक पहुंच गई है।
जंतर-मंतर से सफदरजंग अस्पताल तक: पुलिस की ‘मॉक ड्रिल’ कार्रवाई
सोनम वांगचुक के शांतिपूर्ण अनशन को खत्म करने के लिए दिल्ली पुलिस द्वारा अपनाए गए तरीके पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
- मॉक ड्रिल के नाम पर खेल: पुलिस अधिकारियों ने जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए मॉक ड्रिल का बहाना बनाया।
- महज तीस सेकंड में कार्रवाई: भारी पुलिस बल ने योजनाबद्ध तरीके से मात्र तीस सेकंड के भीतर वांगचुक को धरना स्थल से उठा लिया और सफदरजंग अस्पताल ले गए।
- हाई कोर्ट के आदेश का हवाला: पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश और मेडिकल इमरजेंसी को ध्यान में रखते हुए की गई है।
अस्पताल का हेल्थ बुलेटिन और वांगचुक का दवा से साफ इनकार
सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराए जाने के बाद भी सोनम वांगचुक का विरोध जारी है। अस्पताल प्रशासन और वांगचुक के समर्थकों के बीच मेडिकल स्थिति को लेकर भारी टकराव देखने को मिल रहा है।
1. पोटेशियम की कमी का दावा
सफदरजंग अस्पताल द्वारा जारी किए गए हेल्थ बुलेटिन में बताया गया है कि वांगचुक के शरीर में पोटेशियम का स्तर काफी घट गया है और उन्हें गंभीर कमजोरी है। अस्पताल के अनुसार उनकी यूरिन कीटोन रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है।
2. वांगचुक और उनके डॉक्टरों का अविश्वास
इन दावों के विपरीत, सोनम वांगचुक ने अस्पताल में किसी भी तरह की दवा या इलाज लेने से साफ इनकार कर दिया है। वांगचुक की टीम के मुख्य डॉक्टर ने भी अस्पताल की रिपोर्ट पर भरोसा न जताते हुए कहा है कि गृह मंत्रालय के अधिकारियों की मौजूदगी के कारण उनकी अपनी मेडिकल टीम को वांगचुक से मिलने नहीं दिया जा रहा है।
वांगचुक की पत्नी ने अस्पताल से डिस्चार्ज करने की उठाई मांग
मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब सोनम वांगचुक की पत्नी ने सफदरजंग अस्पताल की मेडिकल रिपोर्ट पर सीधे तौर पर सवाल खड़े कर दिए।
- रिपोर्ट पर संदेह: वांगचुक की पत्नी का दावा है कि एक दिन पहले ही उनके पति का पोटेशियम स्तर बिल्कुल सामान्य था, ऐसे में अचानक आई इस गिरावट की रिपोर्ट संदेहास्पद है।
- तुरंत डिस्चार्ज की मांग: उन्होंने अस्पताल प्रशासन से मांग की है कि सोनम वांगचुक को तुरंत डिस्चार्ज किया जाए ताकि वे किसी ऐसे अस्पताल में जा सकें जहां उन्हें मेडिकल प्रक्रिया पर पूरा भरोसा हो।
अमेरिका तक गूंजी अनशन की आवाज: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
सोनम वांगचुक का यह अनशन अब केवल भारत तक सीमित नहीं रह गया है; अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसे भारी समर्थन मिल रहा है।
वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के बाहर प्रदर्शन
अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन में भारतीय दूतावास के बाहर नागरिक संगठनों ने एकजुट होकर प्रदर्शन किया। महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने जमा हुए इन प्रदर्शनकारियों ने नीट परीक्षा पेपर लीक मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही, उन्होंने वांगचुक की मांगों का समर्थन करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी पुरजोर मांग उठाई है।
वांगचुक के बाद अभिजीत दीपके ने संभाला मोर्चा
पुलिस की कार्रवाई से आंदोलन को कुचलने की कोशिशों के बीच एक नया चेहरा सामने आया है। सोनम वांगचुक को जबरन अस्पताल भेजे जाने के बाद, धरना स्थल पर मौजूद अभिजीत दीपके ने तुरंत अनशन शुरू कर दिया है। दीपके ने साफ कर दिया है कि जब तक सोनम वांगचुक वापस जंतर-मंतर नहीं लौट आते, तब तक वे इसी जगह पर भूख हड़ताल पर बैठे रहेंगे।
निष्कर्ष: सरकार के लिए बढ़ती चुनौती
सोनम वांगचुक का स्वास्थ्य, पुलिस की विवादास्पद कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहा समर्थन, केंद्र सरकार के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। नीट पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या पर जवाबदेही तय करने की मांग अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुकी है। सरकार को जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाना होगा, अन्यथा यह राजनीतिक गतिरोध और अधिक गहरा सकता है।
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