बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली:
क्या आपके घर के लॉकर या तिजोरी में भी बरसों पुराना सोना पड़ा हुआ है? क्या आप भी उस सोने को सिर्फ त्योहारों या शादियों में ही बाहर निकालते हैं और बाकी समय उसकी सुरक्षा की चिंता में डूबे रहते हैं? अगर हां, तो आपके लिए केंद्र सरकार एक ऐसी जबरदस्त योजना लेकर आ रही है, जो आपके घर में रखे ‘डेड गोल्ड’ (निष्क्रिय सोने) को ‘कमाई का जरिया’ बना देगी. सरकार बहुत जल्द Gold Monetization Scheme 2.0 (GMS 2.0) लॉन्च करने की तैयारी में है.
बाजार के गलियारों में इस वक्त सबसे बड़ी चर्चा यही है कि ‘अब निकलेगा घर में पड़ा सोना’। इस नई योजना के जरिए सरकार का लक्ष्य घरों और मंदिरों में पड़े हजारों टन सोने को बैंकिंग सिस्टम में वापस लाना है। इससे न सिर्फ आपकी जेब गरम होगी और आपको नियमित ब्याज मिलेगा, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार भी बुलेट ट्रेन की तरह दौड़ेगी।
आइए इस महा-योजना के हर एक पहलू को बिल्कुल आसान और पानी जैसे सरल शब्दों में समझते हैं।
क्या है Gold Monetization Scheme 2.0 का पूरा सच?
सोना भारतीय परिवारों के लिए सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि एक भावना है। सुख-दुख का साथी होने के साथ-साथ यह निवेश का सबसे सुरक्षित जरिया माना जाता है। लेकिन घरों में बंद पड़ा सोना देश की अर्थव्यवस्था के लिए किसी काम का नहीं होता। इसी सोने को बाजार में लाने के लिए सरकार ने साल 2015 में पहली बार ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ शुरू की थी।
अब सरकार इसके नए और बेहद आसान वर्जन यानी Gold Monetization 2.0 पर काम कर रही है। इस नए मसौदे के तहत पुरानी स्कीम की उन सभी कमियों को दूर किया जा रहा है, जिनकी वजह से लोग अपना सोना बैंकों में जमा करने से कतराते थे। नई योजना को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि आम आदमी बिना किसी डर और झंझट के अपना सोना बैंक में जमा करा सके और उस पर हर साल सुरक्षित ब्याज कमा सके।
भारतीय घरों में कितना सोना है? आंकड़े जानकर चौंक जाएंगे आप!
विश्व स्वर्ण परिषद (World Gold Council – WGC) के चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय घरों और प्रसिद्ध मंदिरों में लगभग 25,000 टन से लेकर 30,000 टन तक सोना जमा है।
- वैश्विक बाजार में इस सोने की कुल कीमत लगभग 1.5 लाख करोड़ डॉलर से लेकर 2 लाख करोड़ डॉलर (भारतीय रुपयों में कई सौ लाख करोड़ रुपये) के बीच आंकी गई है।
- भारत अपनी सोने की जरूरत का लगभग 90 से 95 प्रतिशत हिस्सा विदेशों से आयात (Import) करता है।
- विदेशों से सोना खरीदने के लिए देश को हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च करनी पड़ती है, जिससे देश का व्यापार घाटा बढ़ता है।
विशेषज्ञों का कहना है: “अगर भारतीय घरों में बंद पड़े इस सोने का केवल 10% हिस्सा भी बैंकों के जरिए बाजार में आ जाए, तो भारत को बाहर से सोना आयात करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। इससे देश का रुपया मजबूत होगा और विदेशी मुद्रा की भारी बचत होगी।”
आखिर पुरानी गोल्ड स्कीम क्यों फेल हुई और 2.0 में क्या नया है?
पहले की योजना में सबसे बड़ी दिक्कत यह थी कि लोगों को अपना सोना जमा करने के लिए गिने-चुने सरकारी केंद्रों (CPTCs) पर जाना पड़ता था, जहां कागजी कार्रवाई बहुत लंबी थी। इसके अलावा, शुद्धता जांचने के नाम पर सोने को पिघलाया जाता था, जिससे लोग अपनी पारंपरिक ज्वेलरी खोने के डर से पीछे हट जाते थे।
Gold Monetization 2.0 में होने वाले बड़े बदलाव:
विशेषता पुरानी स्कीम (GMS) नई स्कीम (GMS 2.0) जमा करने का स्थान केवल चुनिंदा सरकारी केंद्र (CPTC) आपके नजदीकी मान्यता प्राप्त ज्वेलर्स न्यूनतम जमा सीमा 10 से 30 ग्राम सोना और भी कम न्यूनतम सीमा की उम्मीद सोना पिघलाने की शर्त अनिवार्य रूप से पिघलाया जाता था गहनों के मूल्यांकन के लिए नए और सरल तरीके ब्याज की दर 2.25% से 2.50% सालाना ब्याज दरों में बढ़ोतरी की पूरी संभावना टैक्स छूट सीमित दायरे में आयकर, कैपिटल गेन और वेल्थ टैक्स में बड़ी राहत अब आपके नजदीकी ज्वेलर ही बनेंगे ‘बैंक’
Gold Monetization 2.0 का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव यह है कि अब आपको सोना जमा करने के लिए किसी दूर-दराज के सरकारी दफ्तर के चक्कर नहीं काटने होंगे। सरकार देश के बड़े और विश्वसनीय ज्वेलर्स को इस योजना से जोड़ने जा रही है।
यानी, आप अपनी गली-मोहल्ले या शहर के जाने-माने हॉलमार्क सर्टिफाइड ज्वेलर्स के पास जाकर अपना सोना सीधे जमा कर सकेंगे। वे ज्वेलर्स आपके सोने की शुद्धता की जांच करेंगे, आपको उसकी रसीद देंगे और वही सोना बैंक में आपके खाते में दर्ज हो जाएगा। इससे ग्राहकों का भरोसा बढ़ेगा और प्रक्रिया बेहद तेज हो जाएगी।टैक्स का कोई झंझट नहीं! सरकार देगी ये 3 बड़ी टैक्स छूट
अक्सर लोग इस डर से भी अपना सोना बाहर नहीं निकालते कि कहीं इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) उनके पीछे न पड़ जाए। लेकिन सरकार ने इस नई योजना को पूरी तरह सुरक्षित और टैक्स-फ्री बनाने का खाका तैयार किया है:
- नो इनकम टैक्स (Income Tax Exemption): इस योजना के तहत जमा किए गए सोने पर आपको जो भी सालाना ब्याज मिलेगा, उस ब्याज पर आपको कोई टैक्स नहीं देना होगा।
- कैपिटल गेन्स टैक्स से आजादी (No Capital Gains Tax): जब आपकी योजना की अवधि पूरी होगी और आपको अपना सोना या उसके बदले पैसा वापस मिलेगा, तो उस पर कोई कैपिटल गेन टैक्स नहीं लगेगा।
- वेल्थ टैक्स से पूरी छूट (No Wealth Tax): आपके सोने की कीमत चाहे कितनी भी बढ़ जाए, इस योजना के तहत जमा सोने पर कोई वेल्थ टैक्स नहीं वसूला जाएगा।
एक जरूरी सवाल: आप घर में कानूनी रूप से कितना सोना रख सकते हैं?
अगर आप इस योजना में शामिल नहीं भी होते हैं, तो भी आपको यह पता होना चाहिए कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के नियमों के अनुसार आप अपने घर में टैक्स अधिकारियों के डर के बिना कितना सोना रख सकते हैं:
- विवाहित महिला: अपने पास अधिकतम 500 ग्राम तक सोने के आभूषण रख सकती हैं।
- अविवाहित महिला: अपने पास अधिकतम 250 ग्राम तक सोने के आभूषण रख सकती हैं।
- पुरुष (विवाहित या अविवाहित): अपने पास अधिकतम 100 ग्राम तक सोने के आभूषण रख सकते हैं।
ध्यान दें: अगर आपके पास घोषित आय (Declared Income) के वैध स्रोत हैं या आपको यह सोना वसीयत/विरासत में मिला है और उसके दस्तावेज आपके पास हैं, तो आप इससे अधिक मात्रा में भी सोना घर पर रख सकते हैं।ग्राहकों को कैसे होगा दोहरा मुनाफा?
इस स्कीम में निवेश करने वाले किसी भी व्यक्ति को सीधा डबल मुनाफा मिलने वाला है:
- सोने की कीमत बढ़ने का फायदा: अगर आज आपने 50 ग्राम सोना जमा किया है और 5 साल बाद सोने की कीमत 30% बढ़ जाती है, तो आपको बढ़े हुए भाव का पूरा फायदा मिलेगा।
- सालाना ब्याज का फायदा: सोने की बढ़ती कीमत के साथ-साथ आपको हर साल बैंक की तरफ से तय किया गया ब्याज (जो सीधे आपके बैंक खाते में आएगा) भी मिलता रहेगा। यानी सोने पर दोहरा रिटर्न!
अक्सर पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
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क्या सोने के गहने जमा करने पर उनकी डिजाइन नष्ट हो जाएगी?
जी हां, वर्तमान नियमों के अनुसार सोने की सही शुद्धता जांचने के लिए उसे पिघलाकर बिस्कुट या बार में बदला जाता है। इसलिए इस योजना में उन गहनों को जमा करना सबसे सही रहता है जिन्हें आप भविष्य में दोबारा नए डिजाइन में बनवाने की सोच रहे हैं, या जो टूटे-फूटे सोने के रूप में पड़े हैं।
योजना पूरी होने पर मुझे क्या वापस मिलेगा- सोना या नकद पैसा?
यह पूरी तरह आपकी पसंद पर निर्भर करता है। खाता खोलते समय ही आप यह विकल्प चुन सकते हैं कि मैच्योरिटी (अवधि पूरी होने) पर आपको भौतिक सोना (Physical Gold) चाहिए या फिर उस समय के बाजार भाव के बराबर नकद पैसा।
क्या इस योजना में न्यूनतम और अधिकतम सोने की कोई सीमा है?
पुरानी योजना के तहत न्यूनतम सीमा बहुत कम रखी गई थी ताकि छोटे निवेशक भी जुड़ सकें। वहीं, इस योजना में अधिकतम सोना जमा करने की कोई भी सीमा नहीं है।
क्या ज्वेलर के पास सोना जमा करना पूरी तरह सुरक्षित है?
जी हां, सरकार केवल चुनिंदा और मान्यता प्राप्त हॉलमार्क ज्वेलर्स को ही इसके लिए अधिकृत करेगी। आपके द्वारा जमा किया गया सोना सीधे सरकार और बैंकों की कस्टडी में रहेगा, इसलिए सुरक्षा को लेकर किसी भी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है।
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