समाचार डेस्क, नई दिल्ली:
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है, जो 13 अगस्त तक चलेगा। इस सत्र के दौरान देश की राजनीति में एक बड़ा मोड़ आने की उम्मीद है। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इस मानसून सत्र में कुल 7 महत्वपूर्ण विधेयकों (विधेयक यानी बिल) को संसद के पटल पर रखने की तैयारी कर चुकी है।
लेकिन इन सब के बीच, सबसे ज्यादा चर्चा और राजनीतिक घमासान ‘संविधान (121वां संशोधन) विधेयक’ यानी परिसीमन विधेयक और महिला आरक्षण कानून को तुरंत लागू करने की मांग को लेकर छिड़ गया है। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति तैयार कर ली है, जिससे इस बार का सत्र बेहद हंगामेदार रहने के आसार हैं।
मानसून सत्र में सरकार कौन से 7 विधेयक ला रही है?
मोदी सरकार ने इस 25 दिनों के मानसून सत्र के दौरान कुल 15 बैठकें तय की हैं। सरकार जिन 7 प्रमुख विधेयकों को संसद में पेश और पारित कराने का एजेंडा लेकर आ रही है, उनकी पूरी सूची नीचे दी गई है:
मानसून सत्र का विधायी एजेंडा:
| क्र.सं. | विधेयक का नाम | मुख्य उद्देश्य |
|---|---|---|
| 1 | पतित राष्ट्रध्वज (निवारण) संशोधन विधेयक | राष्ट्रीय ध्वज के अपमान को रोकने और इससे जुड़े कड़े दंडात्मक प्रावधान करना। |
| 2 | नियमित भारत शिक्षा अभियान विधेयक | देश के भीतर उच्च शिक्षा और प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में बड़े प्रशासनिक सुधार करना। |
| 3 | आयकर (संशोधन) विधेयक | कर प्रणाली को और अधिक सरल बनाना तथा कुछ विशेष मामलों में छूट का प्रावधान। |
| 4 | सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक | शीर्ष अदालत में बढ़ते लंबित मामलों के निपटारे के लिए जजों की संख्या में बढ़ोतरी करना। |
| 5 | राष्ट्रीय संस्थान के अपात्रों की रोकथाम विधेयक | भर्ती परीक्षाओं और राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में गड़बड़ी रोकने के लिए कड़े नियम। |
| 6 | सूक्ष्म और लघु परियोजना (संशोधन) विधेयक | छोटे उद्योगों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना और लघु उद्योगों को बढ़ावा देना। |
| 7 | विदेशी फंड का दुरुपयोग रोकथाम विधेयक | विदेशों से आने वाले फंड और गैर-सरकारी संगठनों की निगरानी बढ़ाना। |
महिला आरक्षण और परिसीमन विधेयक पर विपक्ष का बड़ा दांव
इस सत्र में जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को पूरा करना चाहती है, वहीं विपक्षी दल महिला आरक्षण कानून (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को आगामी चुनावों से ही लागू करने की मांग पर अड़ गए हैं।
कनिमोझी करुणानिधि ने पीएम मोदी को लिखा पत्र
तमिलनाडु से द्रमुक की वरिष्ठ सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर बेहद महत्वपूर्ण मांग उठाई है:
- सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग: कनिमोझी ने मांग की है कि महिला आरक्षण विधेयक (जो पारित हुआ था) को लागू करने के लिए सरकार सभी राजनीतिक दलों की एक सर्वदलीय बैठक बुलाए।
- परिसीमन से लिंक हटाने की पैरवी: विपक्ष का कहना है कि महिला आरक्षण को नई जनगणना और परिसीमन की शर्तों से अलग किया जाना चाहिए। कनिमोझी के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक के समय पूर्ववर्ती सरकार ने इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा था, ताकि इसे बिना किसी देरी के लागू किया जा सके।
- दक्षिण भारत को नुकसान का डर: विपक्षी दलों का तर्क है कि यदि जनगणना के बाद लोकसभा सीटों का परिसीमन जनसंख्या के आधार पर किया गया, तो बेहतर परिवार नियोजन अपनाने वाले दक्षिण भारतीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु, केरल) की लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं, जबकि उत्तर भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व बढ़ जाएगा।
शरद पवार के दांव के बाद सुप्रिया सुले के बदले सुर, महायुति में खलबली
महाराष्ट्र की राजनीति में भी इस परिसीमन और महिला आरक्षण बिल को लेकर अचानक सुर बदलते दिख रहे हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने संसद में इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं:
- संसद में घेरेगी एनसीपी: सुप्रिया सुले ने स्पष्ट किया है कि वे संसद में महिला आरक्षण को तुरंत प्रभाव से लागू करने की आवाज उठाएंगी।
- महाराष्ट्र की सीटों का समीकरण: महाराष्ट्र में कुल 48 लोकसभा सीटें हैं। यदि परिसीमन होता है, तो सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 75 से 80 हो सकती है। सुप्रिया सुले ने कहा है कि परिसीमन और जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन करते समय राज्यों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए।
- विपक्ष की एकजुटता: शरद पवार के नेतृत्व वाले विपक्षी धड़े ने साफ कर दिया है कि वे सदन में सरकार के इस फॉर्मूले का कड़ा विरोध करेंगे, जिससे सत्तापक्ष के भीतर भी सहयोगियों को लेकर मंथन शुरू हो गया है।
प्रियंका चतुर्वेदी ने केंद्र सरकार को घेरा: “यह व्यक्तिगत एजेंडा नहीं”
शिवसेना (यूबीटी) की राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
- देरी पर उठाए सवाल: प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जब पूरे देश ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन किया था, तब सरकार ने इसे जनगणना और परिसीमन की जटिल शर्तों में क्यों उलझा दिया?
- महिलाओं के साथ धोखा: उन्होंने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनावों में देश की आधी आबादी को उनका हक न देना सीधे तौर पर महिलाओं के साथ धोखा है। सरकार को इसी सत्र में परिसीमन की शर्त को हटाने के लिए एक नया संशोधन विधेयक लाना चाहिए।
सत्र से पहले गठबंधन की समन्वय बैठक: रणनीति तैयार
संसद सत्र को सुचारू रूप से चलाने और विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए सत्तापक्ष के घटक दलों ने भी एक महत्वपूर्ण बैठक की है।
- गृह मंत्री और रक्षा मंत्री की अगुवाई: केंद्रीय गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने सहयोगियों के साथ बैठक कर सभी 7 महत्वपूर्ण बिलों को सर्वसम्मति से पास कराने की रणनीति बनाई है।
- विपक्ष के सवालों का जवाब: सरकार का पक्ष है कि परिसीमन एक संवैधानिक प्रक्रिया है जिसे जनगणना के आंकड़ों के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वे नियमों के तहत ही आगे बढ़ रहे हैं और विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
निष्कर्ष: क्या मानसून सत्र में बनेगा कोई नया इतिहास?
मानसून सत्र की शुरुआत हमेशा से ही भारतीय राजनीति में नए समीकरणों को जन्म देती है। इस बार जहां सरकार 7 महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की जल्दी में है, वहीं विपक्ष ने परिसीमन और महिला आरक्षण के मुद्दे पर सरकार को पूरी तरह से घेरने का मन बना लिया है। 20 जुलाई से शुरू हो रहे इस संग्राम में देखना होगा कि संसद के भीतर जनता के मुद्दों पर काम होता है या फिर पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाता है।
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संसद का मानसून सत्र कब से कब तक चलेगा?
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा, जिसमें कुल 25 दिनों के दौरान 15 बैठकें आयोजित की जाएंगी।
इस मानसून सत्र में सरकार कुल कितने विधेयक ला रही है?
केंद्र सरकार इस सत्र में कुल 7 महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने जा रही है, जिनमें आयकर संशोधन और सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की संख्या से जुड़े बिल शामिल हैं।
कनिमोझी करुणानिधि ने पीएम मोदी को पत्र क्यों लिखा है?
सांसद कनिमोझी ने महिला आरक्षण कानून को जनगणना और परिसीमन की शर्त के बिना तुरंत लागू करने के संबंध में चर्चा के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है।
विपक्षी दल परिसीमन का विरोध क्यों कर रहे हैं?
विपक्ष का मानना है कि जनसंख्या के आधार पर परिसीमन करने से दक्षिण भारत के उन राज्यों की सीटें कम हो सकती हैं जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर काम किया है, जिससे उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर होगा।
सुप्रिया सुले और प्रियंका चतुर्वेदी की इस बिल पर क्या मांग है?
दोनों महिला सांसदों की मांग है कि महिला आरक्षण अधिनियम को बिना किसी देरी के लोकसभा चुनावों से ही देश में लागू किया जाना चाहिए।
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