SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा कदम, 17 राज्यों में वोटर लिस्ट अपडेट शुरू

SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग का बड़ा कदम: देश के 17 राज्यों में शुरू होगा वोटर लिस्ट का विशेष पुनरीक्षण (SSR)

देश में चल रहे राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम के बीच चुनाव आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है। विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे ‘SIR’ (विशेष गहन पुनरीक्षण) विवाद के बीच अब निर्वाचन आयोग ने 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूचियों के ‘SSR’ (विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण) का ऐलान कर दिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले वोटर लिस्ट को पूरी तरह शुद्ध करना और नए मतदाताओं के नाम जोड़ना है।

किन राज्यों में होगी प्रक्रिया और क्या है पूरा शेड्यूल?

चुनाव आयोग के निर्देश के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर और गोवा समेत कुल 17 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया चलाई जाएगी। इनमें से कई ऐसे राज्य हैं जहाँ अगले साल (2027) विधानसभा चुनाव होने हैं।

आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार:

  • 12 नवंबर 2026: इन सभी राज्यों और क्षेत्रों में मतदाता सूची का ड्राफ्ट (प्रारंभिक सूची) जारी किया जाएगा।
  • 11 दिसंबर 2026: मतदाता सूची में नाम जुड़वाने, हटाने या किसी भी प्रकार की गलती में सुधार के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तारीख होगी।
  • 4 जनवरी 2027: सभी आपत्तियों का निपटारा करने के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।

इसके साथ ही, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो युवा 2027 में 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले हैं, वे पहले से ही इसके लिए आवेदन कर सकेंगे।

SIR और SSR में क्या है मुख्य अंतर?

राजनीतिक गलियारों में इन दिनों ‘SIR’ और ‘SSR’ को लेकर काफी चर्चा है। जानकारों के अनुसार, दोनों प्रक्रियाओं में बुनियादी अंतर है:

  1. SIR (Special Intensive Revision): इसके तहत घर-घर जाकर या गहन भौतिक सत्यापन के जरिए पूरी मतदाता सूची का नए सिरे से पुनर्मूल्यांकन किया जाता है।
  2. SSR (Special Summary Revision): यह एक वार्षिक या विशेष संक्षिप्त प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से मौजूदा वोटर लिस्ट में नए योग्य नागरिकों के नाम जोड़े जाते हैं, मृत या शिफ्ट हो चुके लोगों के नाम हटाए जाते हैं और विवरणों में सुधार किया जाता है।

चुनाव आयोग के इस नए कदम से उन तमाम युवाओं और नागरिकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके नाम सूची में छूट गए थे या जिन्हें अपने विवरण दुरुस्त कराने थे।

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