‘NEET पेपर बनने से पहले बिकता है’: नंदन नीलेकणि का बड़ा खुलासा; AI रोकेगा लीक?

‘पेपर बनने से पहले ही बिक जाता है’: नंदन नीलेकणि का वह खौफनाक सच और NEET परीक्षा को बचाने का ‘मास्टरप्लान’

भारत में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाले लाखों युवाओं के लिए ‘NEET परीक्षा’ किसी महाकुंभ से कम नहीं है, लेकिन पिछले कुछ सालों में पेपर लीक (Paper Leak) के काले साए ने इस परीक्षा की पवित्रता को तार-तार कर दिया है। हर साल परीक्षा से ठीक पहले व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर क्वेश्चन पेपर वायरल होने की घटनाओं ने देश के सिस्टम को हिला कर रख दिया है। इसी बीच, देश के दिग्गज टेक गुरु और हाई-पावर कमेटी के प्रमुख नंदन नीलेकणि ने एक ऐसा विस्फोटक और बेबाक सच सामने रखा है, जो हर अभिभावक और छात्र की आंखें खोल देगा: “पेपर तब बनता है, जब वह बिक चुका होता है!”

इस गंभीर संकट से निपटने के लिए नीलेकणि कमेटी ने सरकार को कुछ ऐसे क्रांतिकारी और अचूक सुझाव दिए हैं, जो आने वाले समय में देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तस्वीर पूरी तरह बदल सकते हैं।

नीलेकणि कमेटी के वे 7 क्रांतिकारी सुझाव, जो रोकेंगे हर लीक

पारंपरिक तरीके से छपने वाले पेपर और कूरियर से सेंटर्स तक भेजने के पुराने सिस्टम में सेंध लगाना अब बहुत आसान हो गया है। इसी लूपहोल को खत्म करने के लिए नंदन नीलेकणि ने जो ब्लूप्रिंट तैयार किया है, उसके मुख्य बिंदु ये हैं:

  • एग्जाम से ठीक पहले AI तैयार करे क्वेश्चन पेपर: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से परीक्षा शुरू होने से महज कुछ घंटे या मिनट पहले डायनेमिक प्रश्न पत्र जनरेट किए जाएं, ताकि लीक होने की कोई गुंजाइश ही न बचे।
  • डिजिटल और एन्क्रिप्टेड डिलीवरी: प्रश्न पत्रों को फिजिकल फॉर्म में एक शहर से दूसरे शहर ले जाने के बजाय पूरी तरह सेफ और मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्टेड डिजिटल फॉर्मेट में सीधे परीक्षा केंद्रों के कंप्यूटर या प्रिंटर तक भेजा जाए।
  • जीरो-एरर सेंटर्स और बायोमेट्रिक निगरानी: परीक्षा केंद्रों पर केवल कागजी औपचारिकताएं नहीं, बल्कि पुख्ता बायोमेट्रिक चेकिंग और जैमर्स की ऐसी परत हो कि परिंदा भी पर न मार सके।
  • सुरक्षित मूल्यांकन तंत्र (Secure Evaluation System): उत्तर पुस्तिकाओं और ओएमआर शीट की स्कैनिंग और कोडिंग में ह्यूमन इंटरवेंशन (मानवीय दखल) को पूरी तरह शून्य कर दिया जाए।

क्या सचमुच AI रोक पाएगा पेपर माफियाओं का खेल?

शिक्षा जगत और टेक एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली मैनुअल और इंसानों के हाथ में रहेगी, तब तक ‘सॉल्वर गैंग’ और पेपर लीक माफिया इसका फायदा उठाते रहेंगे। नंदन नीलेकणि का यह मॉडल अगर पूरी सख्ती से लागू होता है, तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था में एक नए युग की शुरुआत करेगा, जहां मेहनत करने वाले छात्रों की जीत होगी और भ्रष्ट तंत्र की हार।

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