करियर डेस्क:
बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की संयुक्त मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित होने के बाद राज्य के कोने-कोने से बेहद प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। इस परीक्षा में कठिन परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के बावजूद राज्य के होनहार युवाओं ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। इस कड़ी में बेगूसराय जिले के दो लाल—अजीत कुमार और राजू कुमार ने अपनी कड़ी मेहनत के दम पर इतिहास रच दिया है।
एक तरफ जहां संजात गांव के रहने वाले अजीत कुमार ने बिना किसी कोचिंग के अपने पहले ही प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) का पद हासिल किया है, वहीं दूसरी तरफ खोदावंदपुर प्रखंड के मलमल्ला गांव के राजू कुमार ने डीएसपी (Deputy Superintendent of Police) पद पर चयनित होकर पूरे जिले का नाम रोशन किया है। इन दोनों युवाओं की संघर्षपूर्ण और प्रेरक कहानियां आज देश के लाखों अभ्यर्थियों के लिए मिसाल बन गई हैं।
मां आंगनबाड़ी सेविका, बेटे ने पहले ही प्रयास में क्रैक किया BPSC परीक्षा
संजात गांव के रहने वाले अजीत कुमार की सफलता की कहानी संघर्ष और अटूट संकल्प की एक अद्भुत मिसाल है। अजीत ने साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो अभाव भी सफलता की राह नहीं रोक सकते।
विपरीत हालातों में मां ने संभाला घर
अजीत कुमार की माता मंजू देवी एक आंगनबाड़ी सेविका हैं। उन्होंने बेहद सीमित आय और विपरीत पारिवारिक परिस्थितियों के बावजूद अपने बच्चों की शिक्षा में कभी कोई कमी नहीं आने दी। मां के इस त्याग और संघर्ष को अजीत ने बेकार नहीं जाने दिया और अपनी पहली ही कोशिश में राज्य प्रशासन के सबसे प्रतिष्ठित पदों में से एक हासिल कर लिया।
बिना किसी कोचिंग के हासिल की 16वीं रैंक
आमतौर पर सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए छात्र बड़े शहरों का रुख करते हैं और महंगी कोचिंगों का सहारा लेते हैं। इसके विपरीत, अजीत कुमार ने बिना किसी कोचिंग के, केवल सेल्फ-स्टडी (स्व-अध्ययन) के बल पर इस कठिन परीक्षा को पास किया। उन्होंने इस परीक्षा में पूरे राज्य में 16वीं रैंक हासिल की है और समाज कल्याण विभाग में बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) के पद पर अपना चयन सुनिश्चित किया है।
DySP बनने की खुशी में राजू कुमार ने 115 परिवारों को बांटे फलदार पौधे: अनूठी पहल की हर तरफ चर्चा
खोदावंदपुर प्रखंड के मलमल्ला गांव के रहने वाले राजू कुमार का चयन BPSC संयुक्त परीक्षा में पुलिस उपाधीक्षक (DySP) के पद पर हुआ है। राजू ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न बेहद अनोखे तरीके से मनाया है।
- 115 परिवारों को आम के पौधे भेंट किए: सफलता मिलने के बाद आमतौर पर लोग मिठाइयां बांटते हैं, लेकिन राजू कुमार ने समाज और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए गांव के 115 गरीब और किसान परिवारों को फलदार आम के पौधे बांटे।
- पर्यावरण संरक्षण का बड़ा संदेश: इस अनूठी पहल की शुरुआत बिहार सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री की मौजूदगी में की गई। राजू ने संदेश दिया कि यह पौधे आने वाली पीढ़ियों को जीवन और प्रेरणा देंगे।
- परीक्षा में हासिल की 72वीं रैंक: राजू कुमार ने कड़ी मेहनत के बल पर इस परीक्षा में राज्य स्तर पर 72वीं रैंक हासिल की है।
तैयारी करने वाले युवाओं के लिए सफल उम्मीदवारों का खास संदेश
सफलता का परचम लहराने के बाद दोनों ही जांबाज अधिकारियों ने सिविल सेवा की तैयारी कर रहे अन्य अभ्यर्थियों के लिए कुछ बेहद जरूरी बातें साझा की हैं:
- कड़ी मेहनत और धैर्य सबसे जरूरी: अजीत कुमार के अनुसार, परीक्षा की तैयारी के दौरान सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप अपनी कमजोरियों को पहचानें और बिना विचलित हुए लगातार प्रयास करते रहें।
- महंगी कोचिंग की जरूरत नहीं: इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों के इस दौर में अब घर बैठे भी बेहतर तैयारी की जा सकती है, बशर्ते आपके पास सही रणनीति और प्रामाणिक अध्ययन सामग्री (जैसे NCERT पुस्तकें) उपलब्ध हों।
- असफलता से न डरें: राजू कुमार का मानना है कि परीक्षा के सफर में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं, लेकिन जो छात्र अपनी असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ते हैं, वे एक दिन जरूर प्रशासनिक पदों पर पहुंचकर समाज सेवा का अपना सपना पूरा करते हैं।
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अजीत कुमार ने BPSC परीक्षा में कौन सी रैंक हासिल की है और वे किस पद पर चयनित हुए हैं?
अजीत कुमार ने BPSC परीक्षा में पूरे राज्य में 16वीं रैंक हासिल की है और उनका चयन बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO/SDM) के पद पर हुआ है।
क्या अजीत कुमार ने परीक्षा की तैयारी के लिए कोई कोचिंग की थी?
नहीं, अजीत कुमार ने बिना किसी कोचिंग संस्थान की मदद लिए, घर पर रहकर सेल्फ-स्टडी के माध्यम से अपने पहले ही प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की है।
नव-चयनित DySP राजू कुमार ने अपनी सफलता पर क्या अनूठी पहल की?
बेगूसराय के रहने वाले नवनियुक्त DySP राजू कुमार ने अपनी सफलता की खुशी में गांव के 115 गरीब और किसान परिवारों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए फलदार आम के पौधे बांटे।
अजीत कुमार की पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है?
अजीत कुमार एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनकी मां मंजू देवी गांव में ही एक आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्यरत हैं, जिन्होंने कड़े संघर्षों के बीच अपने बेटे को इस मुकाम तक पहुंचाया है।
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