भारतीय शेयर बाजार (Share Market) के लिए आज का दिन यानी 8 जुलाई 2026 किसी काले दिन से कम नहीं रहा। शुरुआती कारोबार में बढ़त दिखाने वाले बाजार में अचानक ऐसी भारी बिकवाली आई कि बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स (BSE Sensex) करीब 1600 अंक (1,677 अंक) से ज्यादा टूट गया, वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी (NSE Nifty) भी 493 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ 23,900 के स्तर से नीचे बंद हुआ। इस अचानक आए मार्केट क्रैश की वजह से महज कुछ ही घंटों के भीतर निवेशकों के करीब ₹8 लाख करोड़ एक झटके में स्वाहा हो गए।
📉 हालिया घटनाक्रम और ट्रंप के बयान: बाज़ार में बड़ी गिरावट की 5 मुख्य वजहें
कतर के दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अचानक टूटने की खबर जैसे ही दलाल स्ट्रीट पर पहुंची, निवेशकों के बीच घबराहट (Panic Selling) फैल गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस महा-क्रैश के पीछे 5 प्रमुख वैश्विक और तकनीकी कारण रहे हैं:
1. अमेरिका-ईरान तनाव और युद्ध का खतरा
- सीजफायर समाप्त: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ हुए अंतरिम समझौते और युद्धविराम (Ceasefire) को अचानक समाप्त करने की घोषणा के बाद पश्चिम एशिया (Middle East) में युद्ध का खतरा गहरा गया है।
- घबराहट में बिकवाली: इस बड़े भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) के कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू निवेशकों ने अपनी पोजीशन तेजी से काटना शुरू कर दिया।
2. कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लगी आग
- $78 प्रति बैरल के पार: मध्य पूर्व में बढ़े तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से उछलकर 75 से 78 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
- भारत पर दोहरा दबाव: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चา तेल आयात करता है। तेल महंगा होने से देश में महंगाई और राजकोषीय घाटा बढ़ने का सीधा दबाव भारतीय कंपनियों के शेयरों पर पड़ा।
3. डॉलर के मुकाबले रुपया रिकॉर्ड कमजोर
- विदेशी फंड्स की निकासी: अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (Bond Yield) में बढ़ोतरी होने की वजह से विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से पैसे निकालना शुरू कर दिया है। इसके चलते डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच गया है।
4. इंडिया विक्स (India VIX) में 30% का ऐतिहासिक उछाल
- बाजार में बढ़ा डर: बाजार में अस्थिरता और डर को मापने वाला सूचकांक ‘इंडिया विक्स’ (India VIX) महज एक ही दिन में 25% से 30% तक उछल गया। विक्स का इतनी तेजी से ऊपर जाना इस बात का संकेत है कि आने वाले दिनों में बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है।
5. मुनाफावसूली और तकनीकी दबाव (Expiry Effect)
- रेजिस्टेंस का टूटना: निफ्टी पिछले कुछ सत्रों से लगातार मजबूत हो रहा था, जिसे 24,500 के स्तर पर एक बड़ा रेजिस्टेंस (बाधा) मिल रहा था। साप्ताहिक एक्सपायरी से ठीक पहले बड़े ट्रेडर्स द्वारा की गई भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) ने गिरावट की आग में घी का काम किया।
🌏 कूटनीतिक स्थिति: एशियाई बाजारों में भी मची मंदी की हाहाकार
भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि इस भू-राजनीतिक तनाव का असर पूरे वैश्विक बाजारों पर देखने को मिला है। अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े रुख के बाद कमजोर वैश्विक संकेतों के कारण एशियाई बाजारों में भी भारी बिकवाली दर्ज की गई:
- जापान और दक्षिण कोरिया पस्त: जापान के प्रमुख इंडेक्स ‘निक्केई’ (Nikkei) और दक्षिण कोरिया के ‘कोस्पी’ (Kospi) में भी भारी गिरावट देखी गई।
- एक्सपर्ट्स की राय: मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री मार्गों (Strait of Hormuz) को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो जाती, तब तक बाजार में यह उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता का माहौल लगातार बना रहेगा।
☢️ परमाणु कार्यक्रम पर अलग-अलग दावे: क्या है असली विवाद की जड़?
अमेरिका और ईरान के बीच इस ताजा विवाद की सबसे बड़ी वजह दोनों देशों के परमाणु कार्यक्रमों और कूटनीतिक शर्तों को लेकर किए जा रहे अलग-अलग दावे हैं।
अमेरिकी प्रशासन का कड़ा रुख
- सख्त आर्थिक प्रतिबंध: अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान को अपने यूरेनियम संवर्धन और परमाणु कार्यक्रम पर पूरी तरह से रोक लगानी होगी।
- समझौते की शर्तों का उल्लंघन: ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ईरान एक तरफ समझौते के करीब होने की बात करता है और दूसरी तरफ नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
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आज भारतीय शेयर बाजार में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
आज बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स लगभग 1600 अंक (1,677 अंक) से ज्यादा टूट गया और निफ्टी 493 अंकों से अधिक की गिरावट के साथ बंद हुआ।
आज शेयर बाजार क्रैश होने का मुख्य कारण क्या है?
इसका सबसे मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीजफायर को अचानक समाप्त करने की घोषणा और मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है।
इस गिरावट से निवेशकों को कितना नुकसान हुआ है?
इसका सबसे मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ सीजफायर को अचानक समाप्त करने की घोषणा और मध्य पूर्व में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है।
कच्चे तेल की कीमतों पर इसका क्या असर पड़ा?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें तेजी से उछलकर $75 से $78 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं।
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