पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब होंगी कम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया सीधा जवाब, तेल कंपनियों को हुआ ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान!

Petrol Diesel Price: कच्चा तेल सस्ता होने पर भी भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अभी क्यों नहीं घट रहे, जानिए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी का पूरा जवाब।
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब होंगी कम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया सीधा जवाब, तेल कंपनियों को हुआ ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान! फोटो क्रेडिट: @hardeepspuri
पेट्रोल-डीजल की कीमतें कब होंगी कम? केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने दिया सीधा जवाब, तेल कंपनियों को हुआ ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान! फोटो क्रेडिट: @hardeepspuri

पेट्रोल डीजल दाम कब घटेंगे ताजा समाचार (Petrol Diesel Price Cut Update News): वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद देश के करोड़ों वाहन चालकों के मन में एक ही सवाल है—भारत में पेट्रोल और डीजल कब सस्ता होगा? इस बड़े सवाल पर अब खुद केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) ने स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है।

हरदीप सिंह पुरी ने साफ शब्दों में संकेत दिया है कि आम जनता को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती के लिए अभी थोड़ा और इंतजार करना पड़ सकता है。 उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चा तेल भले ही 4 महीने के निचले स्तर पर आ गया है, लेकिन घरेलू बाजार में तुरंत दाम घटाना फिलहाल मुमकिन नहीं है। इसके पीछे सरकार ने तेल कंपनियों के भारी नुकसान और कच्चे तेल की खरीद के गणित को मुख्य वजह बताया है।


क्रूड ऑयल हुआ सस्ता, फिर भी अभी क्यों नहीं घट रहे पेट्रोल-डीजल के दाम?

पेट्रोलियम मंत्री ने इसके पीछे ‘एडवांस बाइंग’ (पहले से की गई खरीद) का एक बेहद महत्वपूर्ण कारण समझाया है:

  • दो महीने पुराना स्टॉक: हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि आज आप पेट्रोल पंपों से जो तेल खरीद रहे हैं, वह दरअसल दो महीने पहले खरीदे गए कच्चे तेल से बना है। उस वक्त पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) संकट के कारण कच्चे तेल की कीमतें $110 से $119 प्रति बैरल के शिखर पर थीं और उसकी शिपिंग व इंश्योरेंस कॉस्ट भी बेहद ज्यादा थी।
  • तेल कंपनियों को ₹74,781 करोड़ का बड़ा नुकसान: संकट के दौर में जब वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतें आसमान छू रही थीं, तब भारत की सरकारी तेल कंपनियों (IOC, BPCL, HPCL) ने आम जनता पर बोझ नहीं डाला और लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचा। इस कारण जून तिमाही में इन कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी (LPG) की बिक्री पर ₹74,781 करोड़ का भारी नुकसान (अंडर-रिकवरी) उठाना पड़ा है। कंपनियों को हो रहा यह दैनिक नुकसान करीब ₹1,000 करोड़ तक पहुंच गया था।
  • 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर नहीं होने दी किल्लत: सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि इतनी बड़ी वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद देश के 1 लाख से अधिक पेट्रोल पंपों पर न तो कभी तेल की किल्लत हुई और न ही विदेशों की तरह लंबी कतारें देखने को मिलीं。

तो कब कम होंगी पेट्रोल और डीजल की कीमतें?

दाम घटने के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री ने एक बड़ी शर्त सामने रखी है:

“अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें (जो फिलहाल घटकर $70 प्रति बैरल के आसपास आ गई हैं) अगले कुछ हफ्तों तक इसी निचले स्तर पर स्थिर बनी रहती हैं, तो रिटेल कीमतों में कटौती करना एक जायज सवाल होगा। तब सरकार और तेल कंपनियां इस पर विचार कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान स्थिति में तुरंत किसी बड़े बदलाव पर कयास लगाना सही नहीं होगा।”

सरल शब्दों में कहें तो, जब रिफाइनरियां अब मिल रहे सस्ते कच्चे तेल को प्रोसेस करना शुरू करेंगी और तेल कंपनियां अपने पुराने ₹74,781 करोड़ के घाटे की कुछ हद तक भरपाई कर लेंगी, तभी जाकर आम आदमी की जेब को राहत मिलने का रास्ता साफ होगा।


पिछले 4 वर्षों में भारत में सबसे कम बढ़े दाम

वैश्विक महंगाई का हवाला देते हुए मंत्री ने कहा कि जून 2022 से जून 2026 के बीच दिल्ली में पेट्रोल की कीमतों में केवल 5.58% और डीजल में 6.23% की मामूली बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने पड़ोसी देशों का उदाहरण देते हुए बताया कि जहां पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में ईंधन के दाम 35% से 42% तक बढ़ गए, वहीं भारत में केंद्र सरकार ने समय-समय पर एक्साइज ड्यूटी (Excise Duty) घटाकर और ₹10 प्रति लीटर तक का अतिरिक्त बोझ खुद संभालकर कीमतों को स्थिर रखा है।


हमारा निष्कर्ष: वैश्विक संकट के बीच संतुलन की नीति

भारत अपनी जरूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए वैश्विक परिस्थितियां सीधे हमारे घरेलू बजट को प्रभावित करती हैं। सरकार की मौजूदा नीति साफ है—पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिरता को परखा जाए और तेल कंपनियों के वित्तीय स्वास्थ्य को सुधारा जाए, ताकि भविष्य में आने वाले किसी भी बड़े झटके से देश को सुरक्षित रखा जा सके। हालांकि, अगर डॉलर और क्रूड ऑयल का नरम रुख अगले एक महीने तक जारी रहता है, तो आगामी त्योहारों से ठीक पहले आम जनता को पेट्रोल-डीजल के मोर्चे पर एक बड़ी खुशखबरी जरूर मिल सकती है।

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अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने के बाद भी भारत में पेट्रोल-डीजल सस्ता क्यों नहीं हो रहा?

क्योंकि भारतीय रिफाइनरियां अभी उस कच्चे तेल को प्रोसेस कर रही हैं जो 2 महीने पहले मिडल-ईस्ट संकट के दौरान बहुत ऊंचे दामों पर खरीदा गया था। इसके अलावा सरकारी तेल कंपनियों को पिछली तिमाही में करीब ₹74,781 करोड़ का घाटा हुआ है।

भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कब कम हो सकती हैं?

पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के अनुसार, यदि वैश्विक कच्चे तेल की कीमत ($70 प्रति बैरल के आसपास) अगले कुछ हफ्तों तक इसी तरह स्थिर बनी रहती है, तो आने वाले समय में रिटेल कीमतों को घटाने पर विचार किया जा सकता है।

वर्तमान में भारत के पास कितने दिनों का तेल भंडार (Crude Stock) सुरक्षित है?

सरकार के अनुसार, भारत के पास इस समय अपने पोर्ट्स, रिफाइनरियों, पाइपलाइनों और स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को मिलाकर कुल 76 से 80 दिनों का पर्याप्त कच्चा तेल स्टॉक मौजूद है।


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