एम.के. स्टालिन और सीएम सी. जोसेफ विजय के बीच तीखा राजनीतिक संघर्ष: विधानसभा के बयान से लेकर सोशल मीडिया वार तक
तमिलनाडु की राजनीति में इन दिनों भूचाल आया हुआ है। द्रविड़ मुड़झगम (DMK) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M.K. Stalin) और वर्तमान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (C. Joseph Vijay) के बीच जुबानी जंग चरम पर पहुंच चुकी है। विधानसभा के अंदर शुरू हुआ यह विवाद अब सड़क और सोशल मीडिया तक फैल गया है।
मुख्य बिंदु
आइए जानते हैं इस गरमागरम राजनीतिक मुद्दे की पूरी और ताज़ा अपडेट:
1. विधानसभा में इमरजेंसी और संघर्ष का जिक्र
- सीएम विजय के आरोप: कुछ दिन पहले तमिलनाडु विधानसभा में मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने डीएमके सरकार और उसके इतिहास पर तीखे हमले किए थे। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि पर सरकार के दौरान भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए सरकारिया आयोग (Sarkaria Commission) का जिक्र किया। साथ ही, इमरजेंसी के दौरान एम.के. स्टालिन की गिरफ्तारी और उस पर की गई टिप्पणियों को लेकर सदन में बयान दिया था।
- स्टालिन का कड़ा पलटवार: इस पर एम.के. स्टालिन ने वीडियो जारी कर साफ कहा कि “इतिहास बदला नहीं जा सकता।” उन्होंने याद दिलाया कि जब 1975 में इमरजेंसी के दौरान सरकार बर्खास्त हुई थी, तब पुलिस ने उनके घर पहुंचकर उन्हें MISA के तहत गिरफ्तार किया था। स्टालिन ने दर्द बयां करते हुए कहा कि जेल में उन्हें और अन्य नेताओं को शारीरिक व मानसिक रूप से भयंकर यातनाएं दी गईं, जिसमें उनकी जब्ती (जबड़ा) तक टूट गई थी।
2. “सरकार चलाना सिनेमा की शूटिंग नहीं है” – स्टालिन का तंज
मुख्यमंत्री विजय द्वारा सोशल मीडिया पर रील्स बनाने और आरोपों पर पलटवार करते हुए स्टालिन ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाए:
- रील संस्कृति पर हमला: स्टालिन ने तंज कसते हुए कहा कि प्रशासनिक विफलताओं और अधूरे वादों को छुपाने के लिए केवल सोशल मीडिया पर ‘रील’ बनाई जा रही हैं, और सरकार चलाना कोई फिल्म की शूटिंग नहीं है।
- वादों से पीछे हटने का आरोप: उन्होंने कहा कि जनता से Parandur एयरपोर्ट प्रोजेक्ट, फसल ऋण माफी, मुफ्त एलपीजी सिलेंडर (3 के बजाय 6 वादे) और ‘मग़लिर् उरीमाइ थिट्टम’ (Magalir Urimai Thittam) की बढ़ी हुई राशि जैसे बड़े मुद्दों पर सरकार विफल रही है।
- कानून-व्यवस्था: स्टालिन ने दावा किया कि राज्य में महिलाओं के खिलाफ अपराध और हत्याओं की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
3. भ्रष्टाचार के आरोपों पर सफाई और डीएमके का विरोध प्रदर्शन
- ईडी (ED) के मामलों पर: सरकारिया आयोग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के पत्रों के आधार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर स्टालिन ने कहा कि राजनीतिक द्वेष के चलते केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जाता है, और अधिकांश मामलों में कोई ठोस सबूत नहीं मिला है।
- राज्यव्यापी प्रदर्शन: मुख्यमंत्री विजय की टिप्पणियों और विधानसभा में गरिमा गिराए जाने के विरोध में डीएमके ने राज्य के सभी जिलों में पार्टी मुख्यालयों पर कड़े विरोध प्रदर्शन और रैलियां आयोजित करने का ऐलान किया है।
सत्ता से बाहर होने के बावजूद एम.के. स्टालिन लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं और तमिलनाडु के राजनीतिक गलियारों में यह टकराव आने वाले दिनों में और भी तेज होने के संकेत दे रहा है।
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