जादवपुर यूनिवर्सिटी फिर बनी सियासी अखाड़ा: सीएम सुवेंदु अधिकारी का कड़ा वार, यूनिवर्सिटी ट्रांसफर बिल पास और छात्रों-एलुमनी की चिंता
पश्चिम बंगाल की प्रतिष्ठित जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) एक बार फिर से सूबे की सियासत के केंद्र में आ गई है। यूनिवर्सिटी परिसर में राजनीतिक भिड़ंत, कैंपस की दीवारों पर नारों के विवाद और हाल ही में विधानसभा में पारित हुए नए विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक (University Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक तापमान काफी हाई हो गया है।
मुख्य बिंदु
आइए जानते हैं जादवपुर यूनिवर्सिटी से जुड़े इस गर्माए हुए राजनीतिक मुद्दे की पूरी और ताजा अपडेट:
1. विधानसभा में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी का तीखा हमला
- “सख्त दवा” देने की चेतावनी: पश्चिम बंगाल विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने जादवपुर यूनिवर्सिटी के लेफ्ट-लिनिंग (वामपंथी) शिक्षकों और छात्रों पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी परिसर में “राष्ट्रविरोधी ताकतों” और ‘कश्मीर मांगे आजादी’ या ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ जैसे नारे लगाने वालों को अब “सख्त दवा” (Strict Medicine) दी जाएगी।
- नक्सलवाद की जड़ों को उखाड़ने का दावा: सीएम ने तंज कसते हुए कहा कि जिन लोगों को मार्क्स, लेनिन और चे ग्वेवारा का बहुत ज्ञान है, उनकी इस ऊर्जा का इस्तेमाल राज्य के नए और कमजोर विश्वविद्यालयों में बुनियादी ढांचा सुधारने के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने इसे बंगाल से नक्सलवाद की जड़ों को उखाड़ने का सही समय बताया।
2. विवादों के बीच ‘यूनिवर्सिटी ट्रांसफर बिल’ पास
- कर्मचारियों के ट्रांसफर का अधिकार: विधानसभा में भारी हंगामे और विरोध के बीच पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और कॉलेज (प्रशासन और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 पारित कर दिया गया। इस कानून के तहत राज्य सरकार को यह अधिकार मिल गया है कि वह किसी भी राज्य विश्वविद्यालय के शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को दूसरे विश्वविद्यालयों में ट्रांसफर कर सकती है।
- शिक्षकों का विरोध: जादवपुर यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (JUTA) ने इस बिल का कड़ा विरोध करते हुए इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता (Autonomy) और आत्मनिर्भरता पर सीधा हमला बताया है। शिक्षकों का कहना है कि इस कानून का इस्तेमाल सरकार के खिलाफ बोलने वालों को निशाना बनाने के लिए किया जा सकता है।
3. कैंपस में ग्राफिटी वॉर: ‘फ्री पाक’ और राष्ट्रवाद के नारे
- दीवारों पर राजनीतिक जंग: हाल ही में जादवपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा परिसर की दीवारों को राजनीतिक नारों से मुक्त (Whitewash) कराने के बाद, एबीवीपी (ABVP) कार्यकर्ताओं ने यूनिवर्सिटी की दीवारों पर ‘फ्री पोक’ (Free PoK), ‘अखंड भारत’ और ‘फ्री अक्साई चिन’ जैसे नारे लिख दिए।
- छात्रों और एलुमनी की चिंता: इस लगातार राजनीतिक हस्तेक्षप और अगस्त के मध्य में हुई हिंसा व तोड़फोड़ के बाद, जादवपुर यूनिवर्सिटी के 5,700 से अधिक पूर्व छात्रों (Alumni), शोधकर्ताओं और शुभचिंतकों ने राज्यपाल (चांसलर) आर. एन. रवि को एक पत्र सौंपकर यूनिवर्सिटी की शैक्षणिक स्वतंत्रता और स्वायत्तता को बचाने के लिए तत्काल कदम उठाने की मांग की है।
जादवपुर यूनिवर्सिटी में शैक्षणिक माहौल और राजनीतिक दलों के बीच की यह रस्साकशी आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति को और अधिक गरमाने के पूरे संकेत दे रही है।
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