कर्नाटक में SIR पर सियासी घमासान: धरने पर बैठे डीके शिवकुमार, बोले- ‘BJP विधायक अभय पाटिल ने खुद अपनी गलती मान ली है’
मुख्य बिंदु
कर्नाटक की राजनीति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। राज्य में चुनावी डेटा में कथित गड़बड़ी और मतदाताओं के नाम सूची से काटे जाने के गंभीर आरोपों के बीच मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने आक्रामक रुख अपना लिया है। विरोध प्रदर्शन के तहत मुख्यमंत्री खुद बेंगलुरु में धरने पर बैठ गए हैं, जिसमें कई अन्य मंत्री भी उनके साथ मौजूद रहे।
इस पूरे विवाद के बीच डीके शिवकुमार ने बीजेपी पर बड़ा हमला बोला है और दावा किया है कि बीजेपी विधायक ने खुद अपनी गलती स्वीकार कर ली है। आइए जानते हैं इस सियासी बवाल से जुड़ी पूरी और अंदर की खबर:
1. “70% से ज्यादा बूथों पर फॉर्म-7 का हो रहा है दुरुपयोग”: डीके शिवकुमार
- बड़ी साजिश का आरोप: चुनाव आयोग कार्यालय के बाहर मीडिया और संवाददाताओं से बातचीत करते हुए डीके शिवकुमार ने आरोप लगाया कि कर्नाटक में एक बड़ी साजिश के तहत मतदाताओं के नाम काटे जा रहे हैं।
- बिना पहचान बांटे जा रहे फॉर्म: उन्होंने दावा किया कि राज्य के 70 प्रतिशत से अधिक बूथों पर बीजेपी के नेता बिना किसी पहचान के ‘फॉर्म-7’ (Form 7) का इस्तेमाल कर रहे हैं। पहले से छपे हुए फॉर्म पार्टी नेताओं को सप्लाई किए जा रहे हैं ताकि चुनिंदा लोगों के वोट काटे जा सकें।
2. “बीजेपी विधायक अभय पाटिल ने चुनाव अधिकारियों के सामने मानी गलती”
- अचानक सामने आए विधायक: डीके शिवकुमार ने एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि जांच के दौरान खुद बीजेपी विधायक अभय पाटिल चुनाव अधिकारी के सामने आए और उन्होंने अपनी गलती स्वीकार कर ली।
- लिखित आग्रह: शिवकुमार के मुताबिक, पाटिल ने अधिकारियों के सामने माना कि उनकी तरफ से गलत काम हुआ है, जिसके बाद उन्होंने चुनाव अधिकारी को खुद पत्र सौंपकर यह आग्रह किया कि उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा सूची में शामिल कराए गए फर्जी या आपत्तिजनक नामों को तुरंत हटाया जाए।
3. चुनाव आयोग को सौंपा गया ज्ञापन, रखी गई ये मांगें
इस पूरे मामले पर कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने चुनाव आयोग को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा है, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित मांगें की गई हैं:
- फॉर्म-7 की निष्पक्ष जांच: एसआईआर प्रक्रिया के दौरान भारी मात्रा में जमा किए गए फॉर्म-7 आवेदनों की समयबद्ध और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- डेटा सुरक्षा और एफआईआर: मतदाताओं के ईपीआईसी (EPIC) और चुनावी डेटा की अनधिकृत पहुंच की जांच हो और फर्जी आपत्तियां दर्ज कराने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
सरकार और विपक्ष के बीच छिड़े इस नए आर-पार के बाद कर्नाटक का राजनीतिक पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है, और आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है।
