Election Commission Form 6 Update: चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, फॉर्म-6 से हटा ‘Annexure-D’, नए वोटरों को राहत!

चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: फॉर्म-6 से हटाया गया Annexure-D, नए वोटरों को मिली बड़ी राहत!

भारतीय राजनीति और चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी एक बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। देश में वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) और इससे जुड़े विवादों के बीच भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने एक बड़ा और राहत भरा कदम उठाया है। आयोग ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 (Form 6) से जुड़े अतिरिक्त घोषणापत्र यानी Annexure-D को हटाने का फैसला किया है।

इस फैसले के बाद अब नए वोटरों को रजिस्ट्रेशन के दौरान किन बातों से राहत मिलेगी और इस पूरे विवाद के पीछे की कहानी क्या है, आइए जानते हैं पूरी डिटेल्स:

1. क्या है पूरा मामला और क्यों मचा था विवाद?

  • एसआईआर प्रक्रिया (SIR Process): देश के कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) का काम चल रहा है। इसके तहत ऑनलाइन पोर्टल पर फॉर्म-6 के साथ एक अतिरिक्त घोषणापत्र (Annexure-D) भरना अनिवार्य किया गया था।
  • पारिवारिक डेटा और पुराने रिकॉर्ड की मांग: इस अतिरिक्त घोषणापत्र के कारण नए आवेदकों को खुद या अपने माता-पिता, दादा-दादी के पुराने चुनावी रिकॉर्ड और मैपिंग से जुड़ी जानकारियां देनी पड़ रही थीं।
  • राजनीतिक विरोध और आंतरिक आपत्तियां: विपक्ष के साथ-साथ इस प्रक्रिया और फॉर्म में किए गए बदलावों को लेकर आंतरिक स्तर पर भी सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद यह मामला काफी तूल पकड़ गया और एक बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया।

2. चुनाव आयोग का बड़ा फैसला: अब नहीं देना होगा Annexure-D

  • पोर्टल से हटाया गया घोषणापत्र: बढ़ते विवाद और विभिन्न पक्षों की चिंताओं को देखते हुए चुनाव आयोग ने उन राज्यों और क्षेत्रों से Annexure-D को पूरी तरह हटा दिया है जहां एसआईआर (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।
  • सिर्फ कानूनी फॉर्म-6 भरना होगा: आयोग के इस कदम के बाद अब नए मतदाताओं को पंजीकरण के लिए किसी भी अतिरिक्त झंझट का सामना नहीं करना पड़ेगा। आवेदकों को केवल ‘रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960’ के तहत तय मूल और कानूनी फॉर्म-6 ही भरना होगा।

3. नए वोटरों को क्या होगा फायदा?

  • आसान हुई प्रक्रिया: जिन राज्यों में एसआईआर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां अब नए वोटर आईडी कार्ड के लिए आवेदन करना पहले से काफी ज्यादा सरल और पारदर्शी हो गया है।
  • दस्तावेजों का बोझ कम: अब युवाओं और नए मतदाताओं को अपने परिवार के पुराने मतदान रिकॉर्ड या जटिल मैपिंग डिटेल्स देने की अनिवार्यता से बड़ी राहत मिल गई है।

चुनाव आयोग का यह फैसला उन लाखों युवाओं के लिए एक बड़ी राहत लेकर आया है जो मतदाता सूची में अपना नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर रहे थे।

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