चुनाव आयोग के भीतर घमासान: चुनाव आयुक्तों की शिकायत पर कैबिनेट सचिव के एक्शन न लेने का RTI में बड़ा खुलासा
मुख्य बिंदु
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर आंतरिक मतभेद और प्रशासनिक खींचतान का एक बड़ा मामला सामने आया है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मिले दस्तावेजों से इस बात का खुलासा हुआ है कि दोनों चुनाव आयुक्तों—सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कैबिनेट सचिव को लिखित शिकायत भेजी थी। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था।
चुनाव आयुक्तों ने कैबिनेट सचिव को क्यों लिखी थी चिट्ठी?
- वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ शिकायत: RTI में सामने आए दस्तावेजों के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने 29 जुलाई को कैबिनेट सचिव को अलग-अलग पत्र भेजकर वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त (DEC) मनीष गर्ग के कामकाज के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई थी।
- बिना चर्चा के काम का बंटवारा: आरोप लगाया गया कि प्रशासनिक प्रभाग का अतिरिक्त प्रभार मिलते ही उक्त अधिकारी ने आयोग या संबंधित आयुक्तों से बिना किसी पूर्व चर्चा या मंजूरी के, वरिष्ठ अधिकारियों के बीच काम के बंटवारे (Work Allocation) से जुड़ा आदेश जारी कर दिया था।
- नियमों के उल्लंघन का दावा: चुनाव आयुक्तों का कहना था कि यह कदम ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ के प्रावधानों के विरुद्ध है। इसके अलावा विवेक जोशी ने प्रशासन विभाग से जुड़ी फाइल न दिए जाने का भी मुद्दा उठाया था।
कैबिनेट सचिव ने कार्रवाई क्यों नहीं की? RTI में क्या आया सामने?
- संवैधानिक संस्था की स्वायत्तता: कैबिनेट सचिवालय की फाइल नोटिंग और दस्तावेजों के अनुसार, सरकार का मानना था कि चूंकि यह पत्र दोनों आयुक्तों ने अपनी ‘व्यक्तिगत हैसियत’ से भेजे थे और पूरे चुनाव आयोग की तरफ से कोई आधिकारिक प्रस्ताव नहीं आया था, इसलिए सरकार इस पर सीधे कोई कार्रवाई नहीं कर सकती।
- हस्तक्षेप न करने का निर्णय: कैबिनेट नोट में स्पष्ट किया गया कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, इसलिए कार्यपालिका द्वारा इस तरह के मामलों में सीधा दखल देना उचित नहीं होगा और इसे संस्था के कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता है।
- मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) को भेजी गई कॉपी: कैबिनेट सचिव ने स्पष्ट किया कि यद्यपि अधिकारी की नियुक्ति कैबिनेट की समिति द्वारा होती है, लेकिन आयोग में आने के बाद वह ECI के नियमों के अधीन है। इसके बाद कैबिनेट सचिवालय ने दोनों आयुक्तों के पत्रों की प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यालय को सूचनार्थ भेज दीं, ताकि इस रिकॉर्ड को भविष्य के लिए संधारित किया जा सके।
यह भी पढ़े
अमिताभ बच्चन का बंगला उड़ाने और दिलजीत दोसांझ को जान से मारने की धमकी, मुंबई की मेयर को आया मेल
‘अरुणाचल बॉर्डर पर भारत और चीन आमने-सामने बने हुए हैं’, ITBP डीजी के बयान के बाद गरमाई सियासत
