धामी कैबिनेट का बड़ा फैसला: पहाड़ों में निजी यूनिवर्सिटी खोलना हुआ बेहद आसान, 1.19 लाख युवाओं के रोजगार की राह खुली
मुख्य बिंदु
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में सीमांत क्षेत्र बनबसा में हुई महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक में राज्य के विकास, शिक्षा और रोजगार से जुड़े कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। सरकार ने पर्वतीय क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना से जुड़े नियमों और भूमि मानकों में बड़ा संशोधन किया है। इसके साथ ही युवाओं के कौशल विकास के लिए करोड़ों रुपये की योजना को मंजूरी दी गई है।
आइए जानते हैं धामी कैबिनेट के इन बड़े फैसलों से जुड़ी हर एक बारीक डिटेल:
1. पहाड़ों में निजी विश्वविद्यालय खोलना हुआ आसान, भूमि मानकों में संशोधन
- घटाए गए भूमि और फंड के मानक: राज्य मंत्रिमंडल ने पर्वतीय और मैदानी क्षेत्रों में निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए निर्धारित नीति एवं मानकों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। नए प्रावधानों के तहत अब नियमों को काफी सरल बनाया गया है ताकि दूरदराज के पहाड़ी जिलों में भी उच्च शिक्षण संस्थान आसानी से खुल सकें।
- प्रक्रिया का सरलीकरण: जानकारों का मानना है कि इन संशोधनों से पहाड़ी इलाकों में शिक्षा के बुनियादी ढांचे का विस्तार होगा और स्थानीय छात्रों को अपने ही क्षेत्र में उच्च और तकनीकी शिक्षा के बेहतर अवसर मिल सकेंगे।
2. ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना’ को मंजूरी: 1.19 लाख युवाओं को फायदा
- रोजगार की राह आसान: कैबिनेट ने राज्य के युवाओं को आधुनिक समय की मांग के अनुसार रोजगारपरक कौशल से लैस करने के लिए ‘मुख्यमंत्री उच्च शिक्षा कौशल संवर्धन योजना’ को मंजूरी दी है।
- बजट और दायरा: इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत अगले पांच वर्षों में लगभग 200 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इसका सीधा लाभ राज्य के राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों और उनसे संबद्ध महाविद्यालयों में अध्ययनरत लगभग 1.19 लाख विद्यार्थियों को मिलेगा।
- आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग: इस योजना के तहत छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, ड्रोन टेक्नोलॉजी और अन्य आधुनिक स्किल कोर्सेस का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे वे कॉर्पोरेट जगत और ग्लोबल मार्केट की जरूरतों के अनुसार तैयार हो सकें।
3. कैबिनेट के अन्य प्रमुख फैसले और प्रशासनिक सुधार
- कुक्कुट पालकों को राहत: पहाड़ी क्षेत्रों में कुक्कुट (पोल्ट्री) पालन को बढ़ावा देने के लिए कुक्कुट आहार पर डीबीटी (DBT) के माध्यम से सीधे सब्सिडी देने का निर्णय लिया गया है, जिससे हजारों स्थानीय पालकों को आर्थिक संबल मिलेगा।
- प्रशासनिक सुगमता: पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन विभागों के बीच बेहतर समन्वय के लिए महानिदेशक के नए पद के सृजन को मंजूरी दी गई है। साथ ही टिहरी जिले के नरेंद्रनगर में नया सब-रजिस्ट्रार कार्यालय खोलने पर भी मुहर लगी है।
