SSY, PPF, NSC Interest Rates: सुकन्या समृद्धि और PPF की नई ब्याज दरों का ऐलान, लगातार 11वीं तिमाही में भी नहीं हुआ बदलाव; चेक करें पूरी लिस्ट
मुख्य बिंदु
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 की तीसरी तिमाही (अक्टूबर से दिसंबर 2026) के लिए छोटी बचत योजनाओं (Small Savings Schemes) की नई ब्याज दरों का ऐलान कर दिया है। देश के करोड़ों निवेशकों के लिए राहत भरी खबर यह है कि सरकार ने लोक भविष्य निधि (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) समेत तमाम छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।
खास बात यह है कि स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की ब्याज दरों में पिछले 33 महीनों (लगातार 11वीं तिमाही) से कोई फेरबदल नहीं किया गया है। आइए जानते हैं कि अब किस योजना पर कितना ब्याज मिल रहा है:
1. प्रमुख स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरें (October-December 2026)
| योजना का नाम (Small Savings Scheme) | ब्याज दर (प्रति वर्ष) | मैच्योरिटी / लॉक-इन अवधि |
|---|---|---|
| सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) | 8.2% | 21 वर्ष |
| वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (SCSS) | 8.2% | – |
| नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC) | 7.7% | – |
| किसान विकास पत्र (KVP) | 7.5% | – |
| 5-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट | 7.5% | 5 वर्ष |
| मंथली इनकम स्कीम (POMIS) | 7.4% | – |
| पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) | 7.1% | 15 वर्ष |
| 3-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट | 7.1% | 3 वर्ष |
| 2-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट | 7.0% | 2 वर्ष |
| 1-वर्षीय पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट | 6.9% | 1 वर्ष |
| 5-वर्षीय रिकरिंग डिपॉजिट (RD) | 6.7% | 5 वर्ष |
| पोस्ट ऑफिस सेविंग्स अकाउंट | 4.0% | – |
2. निवेशकों के लिए क्या हैं खास बातें?
- सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) सबसे आगे: बेटियों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए चलाई जाने वाली इस लोकप्रिय योजना पर सबसे अधिक 8.2% का ब्याज मिलना जारी रहेगा, जिससे पैरेंट्स को बड़ा फायदा मिल रहा है।
- पीपीएफ (PPF) निवेशकों को राहत: आम निवेशकों के बीच सबसे ज्यादा लोकप्रिय पब्लिक प्रोविडेंट फंड पर ब्याज दर 7.1% पर बरकरार है। इसमें निवेश करने पर EEE (Exempt-Exempt-Exempt) टैक्स छूट का फायदा भी मिलता है।
- हर तिमाही होता है रिव्यू: वित्त मंत्रालय हर तिमाही की शुरुआत से पहले देश के आर्थिक हालातों और सरकारी बॉन्ड यील्ड के आधार पर इन दरों की समीक्षा करता है, लेकिन इस बार भी दरों को स्थिर रखने का ही फैसला लिया गया है।
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