Share Market Crash: शेयर बाजार में 25 साल बाद गिरावट का सबसे लंबा दौर, लगातार 8 हफ्ते की मंदी में निवेशकों के ₹26 लाख करोड़ डूबे
मुख्य बिंदु
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) के इतिहास में इस वक्त एक बेहद डरावना और चिंताजनक दौर चल रहा है। सेंसेक्स और निफ्टी (Sensex & Nifty) में लगातार गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बाजार में आई इस भयंकर मंदी ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यह पिछले 25 वर्षों में लगातार साप्ताहिक गिरावट का सबसे लंबा दौर बन गया है, जिसने साल 2020 के कोविड-19 क्रैश और 2008 के ग्लोबल फाइनेंशियल संकट के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ दिया है। इस लगातार 8 हफ्तों की भारी गिरावट के चलते निवेशकों के करीब 26 लाख करोड़ रुपये पानी में बह गए हैं।
आइए जानते हैं शेयर बाजार में आए इस एतिहासिक भूचाल और मंदी की पूरी और विस्तृत कहानी:
1. 25 साल का रिकॉर्ड टूटा: लगातार 8वें हफ्ते फिसला बाजार
- कितनी बड़ी है गिरावट? पिछले आठ हफ्तों की लगातार मंदी में निफ्टी करीब 8.7% और सेंसेक्स लगभग 8.4% नीचे लुढ़क चुका है। अंकों के हिसाब से देखें तो पिछले 8 हफ्तों में सेंसेक्स 6,590 अंक और निफ्टी 2,149 अंक टूट चुका है।
- मार्केट कैप में भारी कमी: इस लंबी गिरावट के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 467 लाख करोड़ रुपये से नीचे आ गया है। सिर्फ सितंबर महीने में ही निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
2. शेयर बाजार में इस भयंकर तबाही के 4 मुख्य कारण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय एक साथ कई नकारात्मक वैश्विक और घरेलू कारक भारतीय बाजार पर भारी पड़ रहे हैं:
- विदेशियों (FIIs) की ताबड़तोड़ बिकवाली: बाजार पर सबसे बड़ा दबाव विदेशी संस्थागत निवेशकों की भारी बिकवाली का है। अकेले सितंबर महीने में FIIs ने भारतीय बाजार से 44,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की निकासी की है, जिससे शेयर लगातार बिक रहे हैं।
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में जोरदार उछाल: अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 5.3% के पार पहुंच गई है, जो 2002 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। इससे विदेशी निवेशकों के लिए उभरते बाजारों (Emerging Markets) के मुकाबले सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करना ज्यादा फायदेमंद साबित हो रहा है।
- कच्चे तेल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें: ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गए हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के आयात बिल, महंगाई और राजकोषीय घाटे को बढ़ाने का काम कर रहा है।
- रुपये में कमजोरी: विदेशी पूंजी की निकासी और महंगे तेल के दबाव के कारण भारतीय रुपया भी कमजोर होकर रिकॉर्ड निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है।
3. निवेशकों के लिए आगे क्या है रणनीति?
- निफ्टी अपने रिकॉर्ड हाई से 15% नीचे: निफ्टी अपने जनवरी के रिकॉर्ड हाई (करीब 26,373) से लगभग 15% नीचे आ चुका है। यदि यह गिरावट 20% तक पहुंचती है, तो तकनीकी रूप से इसे पूर्ण ‘बियर मार्केट’ (Bear Market) मान लिया जाएगा।
- एक्सपर्ट्स की सलाह: बाजार के जानकारों का कहना है कि मौजूदा कमजोरी के इस दौर में छोटे निवेशकों को घबराकर अपने शेयर औने-पौने दामों में नहीं बेचने चाहिए। यह समय मजबूत फंडामेंटल वाले दिग्गज शेयरों (Large-caps) में चुनिंदा तरीके से खरीदारी करने का हो सकता है, हालांकि बाजार में अभी कुछ और हफ्तों तक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।
