सीजेआई और न्यायपालिका पर टिप्पणी मामला: सुप्रीम कोर्ट ने संजय राउत को 17 नवंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का दिया निर्देश
मुख्य बिंदु
देश की राजनीति और न्याय जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायपालिका के खिलाफ कथित तौर पर विवादित टिप्पणियां करने के मामले में शिवसेना (UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें 17 नवंबर को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया है। आइए जानते हैं इस मामले से जुड़ी मुख्य बातें:
1. क्या है पूरा मामला और क्यों घिरे संजय राउत?
- आपत्तिजनक टिप्पणियां और सोशल मीडिया पोस्ट: संजय राउत और पत्रकार निखिल वागले द्वारा सीजेआई और न्यायपालिका के खिलाफ दिए गए बयानों व सोशल मीडिया पोस्ट (जिसमें अल्बानिया की सुप्रीम कोर्ट के जलने से जुड़ी टिप्पणी भी शामिल थी) को लेकर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) याचिका दायर की थी।
- अटॉर्नी जनरल की मंजूरी: इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने भी अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी थी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने इस पर संज्ञान लिया।
2. सुप्रीम कोर्ट का कड़ा निर्देश
- व्यक्तिगत रूप से होना होगा हाजिर: न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संजय राउत को 17 नवंबर को दोपहर 2 बजे व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
- निखिल वागले को वर्चुअल छूट: इसी मामले में आरोपी बनाए गए पत्रकार निखिल वागले को अदालत ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल माध्यम) के जरिए पेश होने की अनुमति दी है। इससे पहले अदालत ने दोनों को व्यक्तिगत पेशी से छूट दी थी, लेकिन अब नए निर्देशों के बाद राउत को अनिवार्य रूप से हाजिर होना होगा।
