NEET UG 2026: काउंसलिंग के बाद भी खाली रह गईं 800 से ज्यादा MBBS सीटें; महंगी फीस बनी सबसे बड़ी वजह
मुख्य बिंदु
नीट यूजी (NEET UG) काउंसलिंग का अंतिम दौर यानी ‘स्ट्रे-वेकेंसी राउंड’ (Stray Vacancy Round) पूरा होने के बावजूद देश भर के मेडिकल कॉलेजों में 800 से अधिक एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं। लाखों की संख्या में छात्रों के क्वालीफाई करने के बाद भी इतनी बड़ी संख्या में सीटों का रिक्त रहना चौंकाने वाला है। इसके पीछे की सबसे मुख्य वजह डीम्ड यूनिवर्सिटीज और प्राइवेट कॉलेजों की बेहद महंगी फीस को माना जा रहा है।
स्ट्रे-वेकेंसी राउंड का हाल और सरकारी बनाम प्राइवेट का अंतर
- सरकारी में केवल 6 सीटें अलाॉट: स्ट्रे-वेकेंसी राउंड में आवंटित हुई कुल सीटों में से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में महज 6 सीटें ही खाली बची थीं, जिन्हें तुरंत भर लिया गया। इसके विपरीत, प्राइवेट और डीम्ड यूनिवर्सिटीज की सैकड़ों सीटें बिना उम्मीदवारों के खाली रह गईं।
- राजस्थान और अन्य राज्यों का हाल: राजस्थान जैसे राज्यों में 177 अंक वाले उम्मीदवारों को भी मैनेजमेंट/प्राइवेट कोटा के तहत सीट अलॉट हुई, लेकिन फीस का भारी बोझ होने के कारण कई छात्रों ने दाखिला लेने से परहेज किया।
तमिलनाडु और पुडुचेरी में सबसे ज्यादा 824 सीटें खाली
- महंगी फीस बनी सबसे बड़ी रुकावट: अकेले तमिलनाडु और पुडुचेरी की 14 डीम्ड यूनिवर्सिटीज में 824 एमबीबीएस सीटें खाली रह गई हैं। इन संस्थानों में सालाना फीस 23 लाख रुपये से लेकर 35 लाख रुपये तक है, जिससे पूरे कोर्स की पढ़ाई का खर्च एक करोड़ रुपये के करीब पहुंच जाता है।
- छात्रों की मजबूरी और विशेषज्ञ राय: कम अंक या कम रैंक वाले उम्मीदवार जो मेडिकल सीट के लिए योग्य हैं, वे केवल अत्यधिक ट्यूशन फीस के डर से ये सीटें नहीं ले पा रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डीम्ड यूनिवर्सिटीज की फीस की कोई सीमा (Fee Cap) तय नहीं की गई, तो हर साल इसी तरह मेडिकल की सीटें खाली छूटती रहेंगी।
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