Jio 1600 Satellites vs Starlink: जियो के 1600 सैटेलाइट प्लान से क्यों बढ़ी एलन मस्क की टेंशन? स्पेस इंटरनेट की रेस में मचा घमासान

Jio 1600 Satellites vs Starlink: जियो के 1600 सैटेलाइट प्लान से क्यों बढ़ी एलन मस्क की टेंशन? स्पेस इंटरनेट की रेस में मचा घमासान

भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में अंतरिक्ष से इंटरनेट (Satellite Internet) देने की जंग अब बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है। एलन मस्क (Elon Musk) की कंपनी स्टारलिंक (Starlink) को भारत में कमर्शियल लॉन्चिंग के लिए अभी जरूरी मंजूरियों का इंतजार है, वहीं मुकेश अंबानी की रिलायंस जियो (Reliance Jio) ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) में 1,600 लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशनों वाला एक मेगा प्रोजेक्ट पेश कर दिया है।

इस बड़े ऐलान के बाद से ही टेक और बिजनेस जगत में चर्चा तेज हो गई है कि क्या इससे एलन मस्क की मुश्किलें बढ़ गई हैं? आइए जानते हैं इस पूरी जंग और जियो के नए प्लान की मुख्य बातें:

1. जियो का मेगा प्लान: 1600 सैटेलाइट और 23 ग्राउंड स्टेशन

‘सॉवरेन सैटेलाइट कनेक्टिविटी’ का विजन

रिलायंस जियो ने देश के कोने-कोने तक हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड और कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए अपने सैटेलाइट प्रोजेक्ट का खाका पेश किया है। कंपनी का लक्ष्य देश के 6 लाख से अधिक गांवों, दूरदराज के पहाड़ी इलाकों, सीमावर्ती क्षेत्रों, द्वीपों और समुद्र में सफर करने वाले जहाजों तक निर्बाध इंटरनेट पहुंचाना है।

बिना टावर सीधे डिवाइस पर कॉलिंग

यह तकनीक पारंपरिक मोबाइल टावर और फाइबर केबल से बिल्कुल अलग होगी। जियो इस सैटेलाइट नेटवर्क को अपने मौजूदा टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ जोड़ेगी, जिससे ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में सीधे मोबाइल डिवाइस पर कॉलिंग और डेटा की सुविधा मिल सकेगी। पूरी वैल्यू चेन (डिजाइन से लेकर लॉन्चिंग तक) को भारत के भीतर ही विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

2. एलन मस्क की नाराजगी और स्टारलिंक की स्थिति

एलन मस्क पिछले काफी समय से भारत में स्टारलिंक की सर्विस शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि कंपनी को GMPCS लाइसेंस और IN-SPACe की कुछ मंजूरियां मिल चुकी हैं, लेकिन स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा संबंधी जांच (Security Evaluation) की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। स्टारलिंक भारत में अपनी ओर से 20 गेटवे साइट्स तैयार कर चुका है।

एकाधिकार के आरोप और सरकार का रुख

मस्क ने हाल ही में सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया था कि भारत में कुछ कारोबारी उनकी एंट्री रोकने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, भारत सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि सैटेलाइट इंटरनेट के लिए सभी कंपनियों (जियो, स्टारलिंक और वनवेब) पर एक समान नियम लागू हैं और सुरक्षा जांच पूरी होने के बाद ही अगला कदम उठाया जाएगा।

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