IRDAI Latest Insurance News: बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव, आईआरडीएआई ने कमीशन ढांचे और नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा
मुख्य बिंदु
बिजनेस न्यूज: बीमा नियामक IRDAI ने इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन और कमीशन नियमों को लेकर जारी किया नया कंसल्टेशन पेपर, ग्राहकों और एजेंटों के लिए क्या हैं बड़े बदलाव
भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने बीमा बाजार में पारदर्शिता बढ़ाने और ग्राहकों के हितों की रक्षा के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। आईआरडीएआई ने “Recalibrating Economics of Insurance Distribution” नाम से एक नया कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसके तहत बीमा पॉलिसियों की बिक्री, एजेंटों के कमीशन और मैनेजमेंट खर्चों में बड़े बदलावों का प्रस्ताव रखा गया है।
1. कमीशन ढांचे में बदलाव और पारदर्शिता (Commission Overhaul & Transparency)
- कमीशन की सीमा तय करने का प्रस्ताव: आईआरडीएआई ने प्रस्ताव दिया है कि विभिन्न बीमा उत्पादों और डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों (जैसे बैंक, कॉर्पोरेट एजेंट और ब्रोकर्स) के लिए प्रोडक्ट-लेवल पर कमीशन की सीमा (Caps) को फिर से लागू किया जाए ताकि लागत को नियंत्रित किया जा सके।
- ग्राहकों को मिलेगी पारदर्शिता: नए प्रस्ताव के मुताबिक, बीमा कंपनियों और बड़े डिस्ट्रीब्यूटर्स को अपनी कमीशन नीतियों को सरल तरीके से सार्वजनिक करना होगा, ताकि ग्राहकों को पता चल सके कि पॉलिसी की कीमत में डिस्ट्रीब्यूशन की कितनी लागत जुड़ी है।
2. मिस-सेलिंग (गलत बिक्री) और जबरन बंडलिंग पर लगाम (Curbing Mis-selling)
- वॉल्यूम-लिंक्ड इंसेंटिव पर रोक: बैंक या एनबीएफसी के कर्मचारियों द्वारा बीमा बेचने पर मिलने वाले वॉल्यूम-बेस्ड या रिवॉर्ड-लिंक्ड इंसेंटिव्स को प्रतिबंधित करने का प्रस्ताव है, जिससे गलत तरीके से पॉलिसी बेचने (Mis-selling) पर रोक लग सके।
- व्यक्तिगत पहचान अनिवार्य: प्रत्येक बेची गई पॉलिसी के साथ बेचने वाले व्यक्तिगत विक्रेता (Individual Seller) की पहचान को जोड़ा जाएगा ताकि जवाबदेही तय की जा सके। यदि मिस-सेलिंग का मामला सामने आता है, तो कमीशन रिकवरी (Claw-back) का भी प्रावधान रखा गया है।
3. मैनेजमेंट खर्च (EoM) की सीमा में कमी
- लागत नियंत्रण: बीमा कंपनियों के मैनेजमेंट खर्च (Expenses of Management – EoM) की सीमा को और सख्त बनाने का प्रस्ताव है, जिससे आने वाले समय में बीमा सेक्टर की लागत अधिक पारदर्शी और किफायती हो सके।
बीमाधारकों के लिए क्या है इसका असर?
आईआरडीएआई के इन प्रस्तावित सुधारों का मुख्य उद्देश्य बीमा बाजार को अधिक ग्राहक-केंद्रित (Customer-centric), पारदर्शी और सुलभ बनाना है। इससे पॉलिसीधारकों को यह समझने में आसानी होगी कि उन्हें पॉलिसी कौन बेच रहा है और उसमें छिपे हुए शुल्क कितने हैं।
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