‘सिस्टम पर शक है या नतीजों पर?’: 124 पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग के समर्थन में लिखा पत्र

‘क्या आपको सिस्टम या नतीजों पर शक है?’: 124 पूर्व नौकरशाहों ने चुनाव आयोग के समर्थन में लिखा खुला पत्र, एसआईआर का किया बचाव

देश में चुनावी प्रक्रिया और संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर चल रही बहस के बीच, 124 पूर्व आईएएस (IAS), आईएफएस (IFS) और अन्य संबद्ध सेवाओं के अधिकारियों ने देश के नागरिकों के नाम एक खुला पत्र जारी किया है। इस पत्र के माध्यम से इन पूर्व नौकरशाहों ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का पुरजोर समर्थन किया है।

1. पूर्व नौकरशाहों का कड़ा सवाल- ‘शक सिस्टम पर है या नतीजों पर?’

  • ठोस सबूतों की मांग: पूर्व अधिकारियों ने अपने पत्र में तीखा सवाल उठाते हुए कहा है कि बिना किसी विश्वसनीय साक्ष्य के चुनाव में धांधली या ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे गंभीर आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश किए जाने चाहिए।
  • दोहरे मानदंडों पर आपत्ति: पत्र में यह भी लिखा गया है कि ऐसा नहीं हो सकता कि जब पार्टियां चुनाव जीतें तो चुनाव प्रणाली पूरी तरह ईमानदार और सही लगे, लेकिन हारने के बाद उसी व्यवस्था और सिस्टम पर धांधली के बेबुनियाद आरोप लगाए जाएं।

2. चुनावी प्रणाली की मजबूती और एसआईआर (SIR) का समर्थन

  • सुरक्षा के कड़े इंतजाम: पूर्व नौकरशाहों का कहना है कि भारत का चुनावी तंत्र अब बूथ कैप्चरिंग और हिंसा के दौर से बहुत आगे निकल चुका है। वर्तमान प्रणाली में पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी, ईवीएम (EVM) की सीलिंग, स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा और वीवीपैट (VVPAT) सत्यापन जैसे कई स्तरों पर सुरक्षा और जांच के पुख्ता उपाय मौजूद हैं।
  • एसआईआर का बचाव: अधिकारियों ने मतदाता सूची की शुद्धता और पारदर्शिता के लिए लाई गई एसआईआर (SIR) प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि बिना आधार के जनता के मन में यह भ्रम पैदा करना कि उनका वोट बेकार गया, लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने की कोशिश है।

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