कच्चे तेल की कीमतों में फिर लगी आग: $110 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, हरकत में आया अमेरिका; क्या महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
मुख्य बिंदु
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उबाल देखने को मिला है। मध्य पूर्व (Middle East) में तनाव बढ़ने और स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज (Strait of Hormuz) में तेल जहाजों पर हमलों की चिंताओं के बीच वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) $110 प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है।
कच्चे तेल की कीमतों में आए इस तेज उछाल ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए महंगाई का खतरा बढ़ा दिया है।
$110 के पास ब्रेंट क्रूड: क्या हैं तेजी के मुख्य कारण?
कच्चे तेल में आई इस अचानक तेजी के पीछे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कारक जिम्मेदार हैं:
- स्ट्रेट ऑफ हॉरमुज में सप्लाई की चिंता: फारस की खाड़ी में जारी भू-राजनीतिक संघर्ष और समुद्री मार्गों में पोतों पर हुए हमलों के कारण तेल आपूर्ति बाधिक होने की आशंका गहरा गई है।
- ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले: क्षेत्र में तेल सुविधाओं और रिफाइनरियों पर मंडराते हमलों के खतरे के चलते ग्लोबल सप्लाई चेन दबाव में आ गई है।
- WTI क्रूड में भी उछाल: अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी छलांग लगाकर $100 प्रति बैरल के पार पहुंच गया है।
हरकत में आया अमेरिका: खोला इमरजेंसी रिजर्व (SPR)
तेल की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए अमेरिका और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) तुरंत एक्शन मोड में आ गए हैं:
- इमरजेंसी रिजर्व से सप्लाई: अमेरिका ने अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (Strategic Petroleum Reserve – SPR) से 1.7 करोड़ बैरल तक कच्चा तेल बाजार में जारी करने का फैसला किया है।
- ग्लोबल स्तर पर पहल: अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के सदस्य देशों ने बाजार में कुल 40 करोड़ बैरल तक आपातकालीन तेल सप्लाई जारी करने पर सहमति जताई है।
क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का भाव $100-$110 प्रति बैरल के ऊपर बने रहने से भारतीय तेल विपणन कंपनियों (OMCs) पर मार्जिन का दबाव बढ़ रहा है।
- हालांकि, केंद्र सरकार ने फिलहाल घरेलू खुदरा ईंधन दरों को स्थिर रखा है।
- बाजार विशेषज्ञों और इकोनॉमिस्ट्स का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के दाम लंबे समय तक $100 के पार बने रहे, तो आगामी महीनों में पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों और विंडफॉल टैक्स की समीक्षा की जा सकती है।
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