BRICS Summit News: नई दिल्ली घोषणापत्र और पीएम मोदी का बड़ा बयान

18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली घोषणापत्र हुआ अडॉप्ट, आतंकवाद और ग्लोबल गवर्नेंस पर प्रधानमंत्री मोदी का बड़ा बयान

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit 2026) का सफलतापूर्वक समापन हो गया है, जिसकी अध्यक्षता भारत ने की। इस दो दिवसीय महासम्मेलन के दौरान दुनिया भर के बड़े नेताओं की मौजूदगी में कई अहम भू-राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा हुई, जिसके बाद सर्वसम्मति से ‘न्यू दिल्ली घोषणापत्र’ (New Delhi Declaration) को स्वीकार किया गया। आइए जानते हैं इस सम्मेलन से जुड़ी मुख्य बातें।

नोट: भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस शिखर सम्मेलन की मुख्य थीम “लचीलेपन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रखी गई थी।

1. BRICS Summit News: ‘न्यू दिल्ली घोषणापत्र’ पर मुहर और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस

शिखर सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने वैश्विक सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दे पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है।

  • सर्वसम्मति से घोषणापत्र पास: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि ब्रिक्स देशों ने बिना किसी आपत्ति के सर्वसम्मति से ‘न्यू दिल्ली घोषणापत्र 2026’ को अपनाया है।
  • आतंकवाद की कड़ी निंदा: इस घोषणापत्र में आतंकवाद और क्रॉस-बॉर्डर टेररिज्म (Cross-Border Terrorism) की कड़े शब्दों में निंदा की गई है तथा अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकवादी हमले को लेकर भी सख्त रुख दोहराया गया है।

2. BRICS Summit News: तकनीक के ‘हथियारीकरण’ और ग्लोबल गवर्नेंस पर पीएम मोदी का फोकस

शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और तकनीक के दुरुपयोग को लेकर चिंता व्यक्त की।

  • आपूर्ति श्रृंखला और मिनरल्स: पीएम मोदी ने चेतावनी दी कि तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) का जिस तरह से हथियारीकरण किया जा रहा है, वह वैश्विक प्रगति के लिए बड़ा खतरा है।
  • पिरामिड ऑफ प्रिविलेज: उन्होंने वैश्विक संस्थानों में सुधार की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा व्यवस्था को ‘पिरामिड ऑफ प्रिविलेज’ से बदलकर ‘प्लेटफॉर्म ऑफ पार्टनरशिप’ बनाने की जरूरत है, जिसमें ग्लोबल साउथ की मजबूत भागीदारी हो।

3. BRICS Summit News: वैश्विक व्यापार, टैरिफ और आपसी कूटनीति

सम्मेलन के इतर वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापारिक चुनौतियों को लेकर भी सदस्य देशों ने साझा चिंताएं व्यक्त की हैं।

  • एकतरफा टैरिफ का विरोध: घोषणापत्र में एकतरफा और गैर-कानूनी टैरिफ उपायों पर गंभीर चिंता जताई गई है जो विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के प्रतिकूल हैं।
  • द्विपक्षीय बैठकें: इस प्रतिष्ठित मंच पर दुनिया के कई शीर्ष नेताओं की आपसी मुलाकातें हुईं, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता और आपसी सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।

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