शेयर बाजार में हाहाकार: ₹1.55 लाख करोड़ स्वाहा, देश की टॉप कंपनियों को बड़ा झटका; HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान
मुख्य बिंदु
भारतीय शेयर बाजार में पिछले सप्ताह जबरदस्त बिकवाली और मंदी का दौर देखने को मिला, जिससे निवेशकों को भारी भरकम नुकसान उठाना पड़ा है। बाजार के इस भारी उतार-चढ़ाव और बिकवाली के कारण देश की दिग्गज कंपनियों का मार्केट कैप धड़ाम हो गया है। आइए जानते हैं इस बड़ी गिरावट के पीछे की पूरी स्थिति और आंकड़ों के बारे में।
टॉप 10 में से 8 कंपनियों का डूबा ₹1.55 लाख करोड़
- मार्केट कैप में भारी सेंध: शेयर बाजार में हुई बिकवाली के चलते देश की 10 सबसे मूल्यवान सूचीबद्ध कंपनियों में से 8 का कुल बाजार पूंजीकरण (Market Capitalization) ₹1,55,671.9 करोड़ घट गया है।
- सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट: पिछले कारोबारी सत्रों के दौरान घरेलू सूचकांकों पर लगातार दबाव बना रहा, जिससे बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी लाल निशान के साथ बंद हुए। छुट्टियों के छोटे हफ्ते के बावजूद बाजार में आई इस गिरावट ने निवेशकों की बड़ी पूंजी डुबा दी है।
किस कंपनी को कितना नुकसान? (किसे सबसे ज्यादा झटका)
- HDFC बैंक सबसे आगे: इस मंदी की आंधी में देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर बैंक यानी HDFC बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ा है। बैंक का बाजार पूंजीकरण ₹55,506.95 करोड़ घटकर ₹10.67 लाख करोड़ के आसपास रह गया, क्योंकि इसके शेयरों में करीब 5% की गिरावट दर्ज की गई।
- बजाय फाइनेंस और रिलायंस: नुकसान के मामले में बजाज फाइनेंस दूसरे स्थान पर रहा, जिसका मूल्यांकन ₹34,180.51 करोड़ घटकर ₹5.77 लाख करोड़ रह गया। इसके अलावा, रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) के मार्केट कैप में भी ₹27,065.08 करोड़ की बड़ी गिरावट आई।
- अन्य दिग्गज कंपनियां: LIC, भारती एयरटेल, एसबीआई (SBI), इंफोसिस और आईसीआईसीआई बैंक के बाजार मूल्यांकन में भी भारी कमी दर्ज की गई है।
इन दो दिग्गज कंपनियों ने बाजार के रुख के उलट दिखाई तेजी
भारी गिरावट और बिकवाली के इस माहौल के बीच कुछ चुनिंदा कंपनियों ने इसके विपरीत शानदार प्रदर्शन किया:
- TCS (टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज): टीसीएस के बाजार पूंजीकरण में ₹23,517.56 करोड़ की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई और इसका मूल्यांकन बढ़कर ₹9.15 लाख करोड़ पर पहुंच गया।
- L&T (लार्सन एंड टुब्रो): इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन क्षेत्र की दिग्गज कंपनी L&T का मार्केट कैप भी ₹1,788.66 करोड़ बढ़कर मजबूत स्थिति में दर्ज किया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजारों के संकेत, विदेशी निवेशकों (FPI) की बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण भारतीय शेयर बाजार पर दबाव लगातार बना हुआ है।
