NEET धांधली में बड़ा मोड़: बायोमेट्रिक टेंडर का मुख्य मास्टरमाइंड प्रमोद कुमार गिरफ्तार, EOU की जांच में खुले कई चौंकाने वाले राज
मुख्य बिंदु
देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET (नीट) में फर्जीवाड़े और धांधली के खिलाफ बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक और बड़ी और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन सिस्टम का फायदा उठाकर परीक्षा सेंटरों में मुन्ना भाइयों और स्कॉलर्स (Proxy Candidates) को घुसाने वाले मुख्य आरोपी प्रमोद कुमार को ईओयू की विशेष टीम ने गिरफ्तार कर लिया है।
लखीसराय के जहाना (हलसी) का रहने वाला प्रमोद कुमार वही शख्स है, जिसने बायोमेट्रिक ऑपरेटरों और वेंडर्स की मिलीभगत से परीक्षा केंद्रों के भीतर असली अभ्यर्थियों की जगह फर्जी स्कॉलर्स को प्रवेश कराया था। इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद शिक्षा जगत, एनटीए (NTA) और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों युवाओं के बीच हलचल तेज हो गई है।
1. बायोमेट्रिक सत्यापन में कैसे हुआ खेल? (मास्टरमाइंड का कबूलनामा)
- कोड-220 से स्कॉलर्स की एंट्री: ईओयू की कड़ाई से की गई पूछताछ में प्रमोद कुमार ने कबूल किया कि उसने विकास कुमार और राहुल के जरिए परीक्षा सेंटरों पर बायोमेट्रिक सत्यापन का टेंडर हासिल किया था।
- ऑपरेटरों के साथ सांठगांठ: केंद्र पर मौजूद बायोमेट्रिक ऑपरेटरों को रिश्वत देकर और तकनीकी खामियों (कोड-220 जैसी सेटिंग) का फायदा उठाकर बायोमेट्रिक मैच न होने के बावजूद स्कॉलर्स को अंदर जाने दिया गया।
- डॉक्टर की पत्नी की जगह स्कॉलर: जांच में सामने आया है कि मेडिकल कॉलेज के छात्र (रवि उर्फ रविशंकर) की पत्नी मधु प्रिया की जगह भी दूसरे स्कॉलर को परीक्षा हॉल में बैठाने के लिए इस नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया था।
2. EOU की रेड और चार्जशीट का दायरा
- 27 नामजद आरोपी और 14 पर चार्जशीट: किऊल और नवादा के मामलों में ईओयू अब तक 27 से अधिक नामजद आरोपियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर चुकी है, जिनमें से 14 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पहले ही दाखिल की जा चुकी है।
- मेडिकल छात्रों और मुन्ना भाइयों पर शिकंजा: पावापुरी मेडिकल कॉलेज (VIMS), पीएमसीएच (PMCH), एनएमसीएच (NMCH) और एएनएमसीएच के कई मेडिकल छात्रों के नाम इस रैकेट में सामने आए हैं, जो पैसों के लालच में असली परीक्षार्थियों की जगह परीक्षा दे रहे थे।
3. अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रणाली पर सीधा असर
- सुरक्षा प्रोटोकॉल पर बड़ा सवाल: फिंगरप्रिंट और फेस रिकग्निशन जैसी हाई-टेक बायोमेट्रिक व्यवस्था के बाद भी टेंडर लेने वाली एजेंसियों के कर्मचारियों की मिलीभगत से धांधली होना एक गंभीर विषय बन चुका है।
- भविष्य की परीक्षाओं में बदलाव: इस खुलासे के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) और राज्य स्तर की एजेंसियां अब बायोमेट्रिक टेंडरिंग और वेंडर वेरिफिकेशन के नियमों को और अधिक सख्त बनाने जा रही हैं, ताकि भविष्य में इस प्रकार का डिजिटल घोटाला न हो सके।
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