NEET PG 2026: 258 छात्रों के 0 या नेगेटिव मार्क्स पर मचा घमासान! IMA ने सुप्रीम कोर्ट में आंसर-की को दी चुनौती, जानें पूरा मामला
मुख्य बिंदु
नीट पीजी (NEET PG 2026) परीक्षा को लेकर इस समय देश भर के मेडिकल छात्रों और चिकित्सा जगत में भारी हलचल मची हुई है। परीक्षा के परिणामों और आंसर-की (Answer Key) को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस बीच, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिससे पूरी चयन प्रक्रिया पर एक बार फिर बहस छिड़ गई है।
आइए जानते हैं इस पूरे विवाद से जुड़ी हर एक बारीक डिटेल, आंकड़ों और एक्सपर्ट्स के विश्लेषण के बारे में:
1. 258 छात्रों के 0 या नेगेटिव नंबर: क्या फिर मिलेंगे माइनस मार्क्स वालों को मौके?
- अजीबोगरीब आंकड़े: नीट पीजी के हालिया आंकड़ों के सामने आने के बाद यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि कम से कम 258 छात्रों के स्कोर या तो शून्य (0) हैं या फिर वे माइनस (Negative) में चले गए हैं।
- क्वालीफाइंग क्राइटेरिया पर सवाल: पिछले वर्षों के अनुभवों को देखते हुए यह सवाल फिर से उठ खड़ा हुआ है कि क्या इस बार भी कटऑफ पर्सेंटाइल गिराकर या अन्य नियमों के तहत इन माइनस और शून्य अंक वाले छात्रों को काउंसलिंग या क्वालिफिकेशन का मौका मिलेगा? इसे लेकर मेडिकल छात्रों और जानकारों के बीच तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
2. आंसर-की को अभ्यर्थियों ने बताया ‘धोखा’, IMA ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती
- छात्रों का आक्रोश: परीक्षा में शामिल होने वाले हजारों अभ्यर्थियों ने जारी की गई आंसर-की और स्कोरिंग सिस्टम को लेकर तीखा असंतोष जताया है। छात्रों का आरोप है कि पारदर्शिता की कमी और सवालों के गलत मूल्यांकन के कारण उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। इसे अभ्यर्थियों ने सीधा-सीधा ‘धोखा’ करार दिया है।
- IMA का कानूनी कदम: छात्रों के व्यापक हितों और परीक्षा की शुचिता को ध्यान में रखते हुए देश के प्रमुख डॉक्टरों के संगठन इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने नीट पीजी की आंसर-की और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित विसंगतियों के खिलाफ सीधे सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर इसे कड़ी चुनौती दी है।
3. काउंसलिंग और भविष्य की प्रक्रिया पर क्या असर पड़ेगा?
- कानूनी पेچ: सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचने के कारण अब आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया और एडमिशन शेड्यूल पर भी अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं।
- छात्रों की मांग: देश भर के रेजिडेंट डॉक्टर्स और एस्पिरेंट्स मांग कर रहे हैं कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए स्वतंत्र समिति से कॉपियों की पुनर्चंच और पारदर्शी नॉर्मलाइजेशन प्रक्रिया अपनाई जाए।
