न्यायपालिका बनाम चुनाव आयोग: जस्टिस उज्जवल भुइयां की दो टूक टिप्पणी के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त पर कांग्रेस का बड़ा हमला!
मुख्य बिंदु
भारतीय राजनीति और न्यायपालिका के गलियारों में इस समय भूचाल आया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां (Justice Ujjal Bhuyan) द्वारा मतदान के अधिकार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर दिए गए एक तीखे बयान ने देश की सियासत में आग लगा दी है। इस बयान को आधार बनाते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC Gyanesh Kumar) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और उनके इस्तीफे की मांग को पूरी तरह तेज कर दिया है।
आइए जानते हैं इस पूरे विवाद और राजनीतिक उठापटक के पीछे की पूरी कहानी:
जस्टिस उज्जवल भुइयां का बयान: ‘लाखों लोगों को वोट से वंचित करना संविधान पर प्रहार’
हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जवल भुइयां ने देश में मतदाता सूची पुनरीक्षण और वोटिंग अधिकारों को लेकर बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वोट देने का अधिकार केवल एक सामान्य वैधानिक अधिकार नहीं है, बल्कि यह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत मिला एक महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार है जो देश की बुनियादी संरचना का हिस्सा है।
जस्टिस भुइयां ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि किसी प्रशासनिक प्रक्रिया के चलते लाखों नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित कर दिया जाता है और उन्हें अपने ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना दिया जाता है, तो ऐसी प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से मनमानी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के कदमों को किसी भी तर्क या दलील से सही नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि यह सीधे तौर पर संविधान के मूल सिद्धांतों पर हमला है।
कांग्रेस का आक्रामक रुख: ‘ज्ञानेश कुमार ने खो दिया पद पर बने रहने का नैतिक अधिकार’
सुप्रीम कोर्ट के जज के इन बहार आए बयानों के तुरंत बाद राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई। कांग्रेस पार्टी ने इसे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत करार दिया है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जस्टिस भुइयां की टिप्पणियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है।
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यशैली और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया ने आम जनता के लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर किया है। पार्टी ने यह मांग की है कि इन गंभीर संवैधानिक उल्लंघनों के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अपने पद पर बने रहने का सारा नैतिक अधिकार खो दिया है, इसलिए उन्हें तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
आने वाले दिनों में और गहराएगा सियासी संघर्ष
जस्टिस उज्जवल भुइयां की इस टिप्पणी और विपक्ष के आक्रामक तेवरों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार की मुश्किलें काफी बढ़ा दी हैं। जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में इस पूरे मामले से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई तेज हो गई है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी दल और छात्र संगठन सड़कों पर उतरकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाला है।
Supreme Court judge Justice Ujjal Bhuyan’s remarks on voting rights
यह वीडियो सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस उज्जवल भुइयां द्वारा मतदान के अधिकार और चुनावी प्रक्रियाओं पर दिए गए उस ऐतिहासिक व सख्त बयान की पूरी जानकारी देता है, जिसने राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।
