सिंगीथम श्रीनिवास राव: साउथ सिनेमा का वह अनमोल रत्न, जिसने 95 साल की उम्र में दुनिया को कहा अलविदा
मुख्य बिंदु
भारतीय सिनेमा जगत से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल को झकझोर देने वाली खबर सामने आ रही है। साउथ सिनेमा के महान, दूरदर्शी और नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्ममेकर सिंगीथम श्रीनिवास राव अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने 95 वर्ष की आयु में चेन्नई के कावेरी अस्पताल में अंतिम सांस ली। उनके निधन से पूरी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ गई है, और तमाम बड़े सितारों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
समय से बहुत आगे की सोचते थे सिंगीथम
सिंगीथम श्रीनिवास राव को भारतीय सिनेमा का एक ऐसा जादूगर माना जाता है, जिन्होंने हमेशा लीक से हटकर फिल्में बनाईं। उन्होंने अपने करियर में तेलुगु, तमिल, कन्नड़, हिंदी और अंग्रेजी जैसी अलग-अलग भाषाओं में लगभग 60 फिल्मों का निर्देशन किया। उनकी सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वे बिना किसी आधुनिक तकनीक या भारी-भरकम बजट के उस दौर में ऐसी माइंड-ब्लोइंग फिल्में बना गए, जिन्हें आज के दौर में भी देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।
इन मास्टरपीस फिल्मों ने बदला सिनेमा का इतिहास
- आदित्य 369 (Aditya 369): साल 1991 में आई नंदमुरी बालकृष्ण की यह फिल्म भारत की सबसे बेहतरीन टाइम-ट्रैवल साइंस-फिक्शन फिल्मों में गिनी जाती है। आज भी इस फिल्म के कॉन्सेप्ट की मिसाल दी जाती है।
- पुष्पक विमानम (Pushpaka Vimanam): कमल हासन स्टारर साल 1987 की यह एक ऐसी क्लासिक ब्लैक कॉमेडी फिल्म थी, जिसमें एक भी डायलॉग नहीं था। इस मास्टरपीस ने नेशनल अवॉर्ड समेत कई प्रतिष्ठित पुरस्कार जीते थे।
- मयूरी (Mayuri): क्लासिकल डांसर सुधा चंद्रन के जीवन पर आधारित यह बायोग्राफिकल ड्रामा आज भी लोगों के जेहन में ताजा है।
94 की उम्र में भी था गजब का जुनून
उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है, इस बात को सिंगीथम श्रीनिवास राव ने अपने काम से साबित किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अपने जीवन के अंतिम पड़ाव यानी 94 साल की उम्र में भी अपनी आखिरी म्यूजिकल फिल्म का निर्देशन किया था, जो उनके सिनेमा के प्रति असीम प्यार को बयां करता है।
कमल हासन और एस.एस. राजामौली समेत इन दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि
सिंगीथम के जाने से पूरी इंडस्ट्री स्तब्ध है। उनके निधन पर सोशल मीडिया पर दिग्गजों के भावुक संदेश सामने आ रहे हैं:
- कमल हासन ने एक बेहद मार्मिक नोट लिखा, “सिंगीथम गारू ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी, वे हमेशा युवा बने रहे और उसी युवा जोश के साथ दुनिया से विदा हुए।”
- एस.एस. राजामौली ने सोशल मीडिया पर लिखा, “लंबे समय पहले जब हमारे पास तकनीक या बजट नहीं था, तब उन्होंने हम सभी से बड़ा सपना देखने का साहस किया। उन्होंने बिना किसी संवाद के फिल्म बनाई, हमें समय की सैर कराई…”
भारतीय सिनेमा ने एक ऐसा अनमोल रत्न खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकती। भगवान उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को इस दुख को सहने की शक्ति दे। ॐ शांति! 🙏
