Share Market Crash & US Bond Yield: भारतीय शेयर बाजार में हाहाकार! लगातार 8 हफ्तों की गिरावट के पीछे क्या है अमेरिकी ‘बॉन्ड यील्ड’ का खेल?
मुख्य बिंदु
भारतीय शेयर बाजार (Indian Stock Market) इन दिनों इतिहास के सबसे सुस्त और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहा है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE Sensex) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (Nifty 50) में लगातार जारी बिकवाली ने निवेशकों की नींद उड़ा दी है। पिछले लगातार 8 हफ्तों से बाजार में गिरावट देखने को मिली है, जिससे निवेशकों के खरबों रुपये स्वाहा हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे केवल महंगा कच्चा तेल ही नहीं, बल्कि अमेरिका से आ रहा एक बड़ा वित्तीय झटका यानी ‘बॉन्ड यील्ड’ (Bond Yield) का खेल मुख्य वजह बना हुआ है।
आइए विस्तार से जानते हैं कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का यह पूरा खेल क्या है और यह भारतीय बाजारों पर किस तरह भारी पड़ रहा है:
1. लगातार 8 हफ्तों से गिर रहा बाजार: निवेशकों को भारी नुकसान
- ऐतिहासिक मंदी: रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 25 सालों में या यूं कहें कि लंबे समय के इतिहास में ऐसा दौर कम ही देखा गया है जब भारतीय शेयर बाजार लगातार 8 हफ्तों तक लाल निशान पर बंद हुआ हो।
- दौलत डूबी: इस मंदी और चौतरफा बिकवाली के चलते निवेशकों की गाढ़ी कमाई के लाखों-करोड़ रुपये डूब चुके हैं, जिससे खुदरा (Retail) और संस्थागत निवेशकों दोनों में भारी चिंता का माहौल है।
2. क्या है अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ‘खेल’?
- रिकॉर्ड स्तर पर यील्ड: अमेरिका में 10 साल की मैच्योरिटी वाले ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर दो दशक से भी ज्यादा समय के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।
- फंड्स का पलायन: जब अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला रिटर्न (Yield) बढ़ जाता है, तो वैश्विक निवेशक (FPIs/FIIs) भारत जैसे उभरते बाजारों के जोखिम भरे इक्विटी मार्केट से अपना पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड में निवेश करने लगते हैं। इसे ही ‘बॉन्ड यील्ड का खेल’ कहा जाता है, जिसके कारण भारतीय बाजारों से भारी मात्रा में पैसा बाहर जा रहा है।
3. महंगे तेल से ज्यादा खतरनाक क्यों है यह संकट?
- FIIs की ताबड़तोड़ बिकवाली: विदेशी निवेशकों द्वारा लगातार की जा रही बिकवाली ने भारतीय शेयरों के भाव गिरा दिए हैं।
- आगे निवेशकों को क्या करना चाहिए? वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक वैश्विक स्तर पर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और ब्याज दरों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को घबराने के बजाय अपनी पोर्टफोलियो रणनीति बेहद समझदारी से बनानी चाहिए।
