भारतीय खेल प्राधिकरण का ऐतिहासिक कदम: खेल अकादमियों के आधुनिकीकरण और एथलीटों के लिए विशेष हाई-परफॉर्मेंस फंड को मंजूरी
मुख्य बिंदु
नई दिल्ली: देश के खेल बुनियादी ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप ढालने और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के उद्देश्य से भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और युवा मामले एवं खेल मंत्रालय ने एक ऐतिहासिक और व्यापक वित्तीय योजना को मंजूरी दी है। इस उच्च-स्तरीय नीति का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर प्रतिभाओं को तराशना और ओलंपिक तथा एशियाई खेलों जैसे वैश्विक मंचों के लिए देश के एथलीटों को विश्व स्तरीय प्रशिक्षण सुविधाएं प्रदान करना है।
हाई-परफॉर्मेंस ट्रेनिंग और आधुनिक बुनियादी ढांचा
मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, देश भर में फैले चुनिंदा राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (NCOEs) को अपग्रेड किया जाएगा। खेल वैज्ञानिकों, बायोमेकैनिक्स विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय स्तर के कोचों की देखरेख में खिलाड़ियों के प्रदर्शन का वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। सरकार का यह कदम खेल विज्ञान के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।
नई नीति के प्रमुख और महत्वपूर्ण बिंदु
इस उच्च-स्तरीय खेल नीति के अंतर्गत कई कड़े और व्यावहारिक सुधारों को शामिल किया गया है, जो सीधे तौर पर खेल व्यवस्था को पारदर्शी और सुदृढ़ बनाएंगे:
- प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता और छात्रवृत्ति: एथलीटों के प्रशिक्षण, आहार और खेल उपकरणों के खर्च के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में धनराशि भेजी जाएगी।
- स्वतंत्र थर्ड-پार्टी ऑडिट: खेल संघों और अकादमियों में पारदर्शिता बनाए रखने और भ्रष्टाचार को रोकने के लिए वार्षिक वित्तीय विवरणों का स्वतंत्र ऑडिट अनिवार्य कर दिया गया है।
- चोट प्रबंधन और बीमा सुरक्षा: सभी अनुबंधित एथलीटों के लिए व्यापक स्वास्थ्य बीमा और खेल के दौरान लगने वाली गंभीर चोटों के त्वरित इलाज के लिए एक विशेष मेडिकल फंड का गठन किया गया है।
- घरेलू और विदेशी एक्सपोजर: युवा खिलाड़ियों को अधिक से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिलेगा, जिससे उनका मानसिक मनोबल और प्रतिस्पर्धात्मक अनुभव मजबूत हो सके।
विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया और भविष्य की रूपरेखा
खेल विशेषज्ञों और वरिष्ठ प्रशासकों ने सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए इसे भारतीय खेल इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय करार दिया है। उनका मानना है कि यदि इन दिशानिर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए, तो आगामी अंतरराष्ट्रीय बहु-खेल स्पर्धाओं में देश के पदकों की संख्या में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिलेगी। संबंधित खेल बोर्ड और राज्य इकाइयां इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए तेजी से कार्य कर रही हैं।
यह भी पढ़े
भारत-न्यूजीलैंड टेस्ट सीरीज: पहले मुकाबले का पूरा शेड्यूल और स्क्वाड
भारत-वेस्टइंडीज सीरीज: पहले टी20 मुकाबले की पूरी जानकारी और स्क्वाड
