India M&A Activity 2026: कम हुए सौदे लेकिन बड़े निवेश और आउटबाउंड डील्स ने पकड़ी रफ्तार, बीसीजी की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा
मुख्य बिंदु
नई दिल्ली: बिजनेस और कॉर्पोरेट जगत से इस वक्त की बेहद अहम और बड़ी खबर सामने आ रही है। बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप (BCG) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2026 के पहले सात महीनों में भारत के मर्जर एंड एक्विजिशन (M&A) यानी विलय और अधिग्रहण के बाजार में एक नया बदलाव देखने को मिला है। इस दौरान डील की कुल वॉल्यूम (संख्या) में लगभग 20 प्रतिशत की गिरावट आई है, लेकिन बड़े सौदों और आउटबाउंड एक्विजिशन (विदेशी कंपनियों के अधिग्रहण) में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई है।
बड़े सौदों और रणनीतिक निवेश पर निवेशकों का जोर
बीसीजी की रिपोर्ट ‘India M&A 2026: Fewer Deals, Bigger Bets’ के मुताबिक, बाजार अब छोटे और कम असरदार सौदों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गया है। कंपनियां और वित्तीय निवेशक अब छोटी डील्स की बजाय बड़े और ठोस विजन वाले ट्रांसफॉर्मेशनल सौदों पर दांव लगा रहे हैं:
- बड़े आकार की डील्स में मजबूती: इस साल शुरुआती सात महीनों में 100 मिलियन डॉलर से अधिक मूल्य वाले 45 सौदे दर्ज किए गए। इसके अलावा, 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा के बड़े ट्रांजैक्शन कुल डील वैल्यू का करीब 59 फीसदी हिस्सा रहे।
- छोटे सौदों में आई सुस्ती: डील वॉल्यूम में आई कुल गिरावट का लगभग आधा हिस्सा 1 मिलियन डॉलर से कम वैल्यू वाले छोटे सौदों का रहा है, जिससे साफ पता चलता है कि निवेशक अब कम समय में छोटे रिटर्न देने वाले सेगमेंट से दूरी बना रहे हैं।
- शेयर बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया: रणनीतिक बदलाव के बीच, जिन कंपनियों ने इस दौरान डील्स की घोषणा की, उन्हें निवेशकों से बेहतर रिस्पॉन्स मिला। 2026 में ऐसी डील्स ने 3.7% का मीडियन 30-दिवसीय रिलेटिव शेयरधारक रिटर्न जनरेट किया, जो पिछले दो सालों के मुकाबले काफी बेहतर है।
आउटबाउंड डील्स (Outbound Transactions) का बढ़ता दायरा
इस साल भारतीय कॉर्पोरेट जगत की सबसे बड़ी खासियत विदेशों में कंपनियों का अधिग्रहण करना रहा है:
- भारतीय रणनीतिक खरीदारों द्वारा विदेश में किए गए अधिग्रहणों (Outbound Deals) की वैल्यू में 3.8 बिलियन डॉलर की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
- विशेषज्ञों का मानना है कि अब देश के केवल बड़े कॉम्बिनेशंस ही नहीं, बल्कि मिड-साइज की कंपनियां भी ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ मजबूत करने और नई टेक्नोलॉजी व क्षमताएं हासिल करने के लिए विदेशी कंपनियों का अधिग्रहण कर रही हैं।
कारोबार जगत के जानकारों का कहना है कि भारतीय बिजनेस इकोसिस्टम अब सतर्कता के साथ ‘कम लेकिन बड़े और मजबूत’ (Fewer but Bigger) रणनीतिक फैसलों की ओर आगे बढ़ रहा है, जो लंबी अवधि में देश की आर्थिक सेहत के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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